
CBSE री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर बड़ा साइबर अटैक (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल पर हाल ही में साइबर हमले की घटना सामने आई। यह घटना उस समय हुई जब हजारों छात्र अपने आवेदन जमा करने के लिए पोर्टल का उपयोग कर रहे थे। बोर्ड ने जानकारी दी कि हमले के बावजूद उसकी सुरक्षा प्रणालियों ने स्थिति को नियंत्रण में रखा और सेवाएं बाधित नहीं हुईं।
CBSE के अनुसार, यह साइबर हमला Denial-of-Service (DoS) तकनीक के माध्यम से किया गया था, जिसका उद्देश्य पोर्टल की सेवाओं को बाधित करना था।
Denial-of-Service (DoS) एक प्रकार का साइबर हमला है, जिसमें किसी वेबसाइट, सर्वर या ऑनलाइन सेवा को सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए अनुपलब्ध बनाने की कोशिश की जाती है।
सामान्य स्थिति में कोई भी वेबसाइट आने वाली रिक्वेस्ट को आसानी से प्रोसेस करती है। लेकिन DoS अटैक के दौरान हमलावर बहुत कम समय में अत्यधिक संख्या में फर्जी या अनावश्यक रिक्वेस्ट भेज देते हैं। इससे सर्वर पर अचानक भारी दबाव पड़ जाता है।
जब सर्वर अपनी क्षमता से अधिक ट्रैफिक संभालने लगता है, तो वेबसाइट की गति धीमी हो सकती है, वह बार-बार क्रैश हो सकती है या पूरी तरह बंद भी हो सकती है। इसका सीधा असर सामान्य उपयोगकर्ताओं पर पड़ता है, जो सेवा का उपयोग नहीं कर पाते।
CBSE ने बताया कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर एक समय में 8,000 से अधिक छात्र सक्रिय थे। इसी दौरान साइबर अपराधियों ने सिस्टम को निशाना बनाया।
जानकारी के अनुसार, केवल दो मिनट के भीतर पोर्टल पर लगभग 15 लाख रिक्वेस्ट भेजी गईं। इसके अलावा सिस्टम की फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए एक लाख से अधिक प्रयास भी किए गए।
यह गतिविधि सामान्य ट्रैफिक से कई गुना अधिक थी, जिससे सिस्टम पर अत्यधिक दबाव बनने की कोशिश की गई।
इस साइबर हमले का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ सकता था जो अपने री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन आवेदन जमा कर रहे थे। ऐसे हमलों के दौरान आमतौर पर वेबसाइट धीमी हो जाती है या पूरी तरह काम करना बंद कर देती है।
हालांकि, इस मामले में छात्रों को बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। CBSE पोर्टल लगातार कार्य करता रहा और हजारों छात्रों के आवेदन सफलतापूर्वक जमा होते रहे।
CBSE ने बताया कि दोपहर 3 बजे तक 16,000 से अधिक छात्रों ने अपने आवेदन सफलतापूर्वक जमा कर दिए थे।
CBSE की साइबर सुरक्षा टीम ने समय रहते स्थिति को संभाल लिया। मजबूत सुरक्षा उपायों और निगरानी प्रणाली के कारण पोर्टल पर हुए हमले का प्रभाव सीमित रहा।
बोर्ड ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था इतनी प्रभावी थी कि पोर्टल 8,000 से अधिक सक्रिय यूजर्स को संभालने में सक्षम रहा और सेवा पूरी तरह बाधित नहीं हुई।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, DoS अटैक केवल वेबसाइट को धीमा करने तक सीमित नहीं होता। यह संस्थानों के पूरे डिजिटल सिस्टम को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे हमले न केवल उपयोगकर्ताओं के अनुभव को खराब करते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण सेवाओं को भी बाधित कर सकते हैं। परीक्षा पोर्टल, बैंकिंग सिस्टम, टिकट बुकिंग और सरकारी सेवाओं जैसे प्लेटफॉर्म पर इसका प्रभाव और भी गंभीर हो सकता है।
Location : New Delhi
Published : 3 June 2026, 12:26 PM IST