
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को पूजा स्थल अधिनियम 1991 के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सीजेआई ने संजीव खन्ना ने कहा कि इस मामले की अगली तक मंदिर-मस्जिद से जुड़ी किसी भी नए मुकदमे को दर्ज नहीं किया जाएगा। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन की स्पेशल बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट से बड़ी खबर
➡️सुप्रीम कोर्ट में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट पर सुनवाई
➡️देश के मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र से 4 हफ्तों में मांगा जवाब
➡️केंद्र से जवाब मिलने के बाद होगी मामले पर अगली सुनवाई#SupremeCourt #PlacesofWorshipAct pic.twitter.com/xsw6putVon— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) December 12, 2024
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाओं के एक समूह में हलफनामा दायर करने को कहा है, जो किसी पूजा स्थल पर पुन दावा करने या 15 अगस्त, 1947 को प्रचलित स्वरूप में उसके स्वरूप में परिवर्तन की मांग करने के लिए मुकदमा दायर करने पर रोक लगाता है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई और उनका निपटारा होने तक देश में कोई और मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई और उनका निपटारा होने तक देश में कोई और मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि निचली अदालत कोई भी प्रभावी या अंतिम आदेश नहीं दें। सर्वे का भी आदेश न दें। केंद्र 4 सप्ताह में एक्ट पर SC में जवाब दाखिल करे।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि अलग-अलग अदालतों में 10 सूट दाखिल हुए हैं और इनमें आगे की सुनवाई पर रोक लगाए जाने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने इस मांग का विरोध किया। सुप्रीम ने मथुरा का मामला जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला और दो अन्य सूट पहले से ही कोर्ट के सामने लंबित है।
Published : 12 December 2024, 4:28 PM IST
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