महराजगंज: भाजपा में ये क्या हो रहा है? न कार्यकर्ता खुश न विधायक.. गुटबाजी और प्रशासनिक अत्याचार चरम पर..

शिवेंद्र चतुर्वेदी

क्या महराजगंज भाजपा का जिला संगठन असहाय, निरीह और पंगु हो गया है या फिर जान-बूझकर गुटबाजी की आग में कार्यकर्ताओं को झोंका जा रहा है.. यह बड़ा सवाल रविवार को उठ खड़ा हुआ। मौका था प्रभारी मंत्री के सामने भाजपा के कार्यकर्ताओं की बैठक का। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सिर्फ डाइनामाइट न्यूज़ पर..


महराजगंज: डाइनामाइट न्यूज़ पहले ही आगाह कर चुका है सत्तारुढ़ भाजपा में इसी तरह से कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न जारी रहा और आसपी कांट-छांट में गुटबाजी को जान-बूझकर पार्टी का जिला संगठन हवा देता रहा तो 2019 में पार्टी की बैंड बजनी तय है।

15 साल तक सपा-बसपा शासन में लाठी-डंडा खाने वाले भाजपा के आम कार्यकर्ताओं की हालत अपनी ही सरकार में बद से बदतर हो गयी है। इसका भांडा फूटा रविवार को। जिले के प्रभारी मंत्री रमापित शास्त्री के सामने जिला पंचायत सभागार में कार्यकर्ता बैठक का आयोजन किया गया।

पहला वाकया

हद तो तब हो गयी जब जिला संगठन से विधानसभा चुनावों में भीतरघात करने के आरोप में 6 साल के लिए पार्टी से निकाले गये एक नेता को इस बैठक में बोलने के लिए बुला लिया गया। इसके बाद तो पार्टी विधायक प्रेम सागर पटेल का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। उन्होंने पार्टी फोरम पर सवाल दागा.. जो व्यक्ति पार्टी से निष्काषित है.. और राष्ट्रीय अध्यक्ष के विरुद्ध अपशब्द भरे नारेबाजी करने में लिप्त हो.. अमित शाह का पुतला फूंकता हो..उसे किस हैसियत से पार्टी की बैठक में बुला लिया गया? विधायक ने कहा संगठन में विधायक को तो पूछा नही जाता और अनुशासन हीनता करने वालों को निष्काषित होने के बावजूद पार्टी की बैठकों में बुलाया जाता है। ज्यादा दिन नही बीता है.. जब सीएम के साथ पंचम तल पर जिले के विधायकों और सांसदों की बैठक हुई और इसकी तस्वीर पार्टी के मीडिया प्रभारी ने फेसबुक पर डाली तो सिसवा विधायक प्रेम सागर पटेल की फोटो की काट कर तस्वीर पोस्ट की गयी। इस तरह की हरकतों को आखिर किसका संरक्षण है और इससे किसका भला होगा..

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क्या पार्टी के जिला संगठन ने यह सोचा कि अगर पार्टी लोकसभा का चुनाव ही नही जीतेगी तो फिर भला मोदी पीएम कैसे बनेंगे? कहीं जिला संगठन गुटबाजी की आड़ में मोदी-योगी की छवि तो खराब करने में नही जुटा?

 

दूसरा वाकया

पार्टी नेता ओम प्रकाश पटेल ने कहा कि एक ही समस्या को लेकर कई बार जिले के अफसरों से मिला लेकिन समस्या का कोई हल नही। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता ब्रजेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों के अफसरों पर सवाल खड़ा किया। 

तीसरा वाकया

फरेन्दा क्षेत्र के एक नेता ने कहा कि 1984 से जुड़े हुए पार्टी के एक पुराने कार्यकर्ता मुरलीधर चौरसिया अपनी जमीन पर निर्माण कार्य नही करा पा रहे हैं। 

एक के बाद एक ताबड़तोड़ कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदारों पर हमला बोला और कहा कि इससे तो अच्छी हालत हमारी विपक्ष में थी। अपनी सरकार में एक भी अधिकारी जायज काम तक नही कर रहे हैं। भ्रष्टाचार चरम पर है। चेहरा देखकर अफसर काम कर रहे हैं किन कौन कार्यकर्ता किस नेता का आदमी है। आम गरीब कार्यकर्ताओं की कोई सुनने वाला नही।

प्रभारी मंत्री रमापति शास्त्री से नाखुश दिखे कार्यकर्ता

प्रभारी मंत्री रमापति शास्त्री को तो मानो पता ही नही कि वे कैबिनेट मंत्री हैं। पिछले एक साल में जिले के एक भी कार्यकर्ता की समस्या का समाधान उन्होंने कराया हो तो ये शायद बहुत बड़ी बात होगी। पिछली बार जब जिले में आये तो वे जीएसटी का फुल फार्म तक नही बता पाये।

मंत्री जी बैठक में कार्यकर्ताओं की बातों की सुनने के दौरान ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे किसी कार्यकर्ता को कोई परेशानी ही न हो। एक बड़े जनप्रतिनिधि की हालत यह थी कि वे कार्यकर्ताओं की बातों पर या तो हंस रहे थे या फिर सो रहे थे। सब जानते हुए भी अंजान बनने का नाटक करने वाले ये नेता आखिर क्यों दिखावटी तौर पर कार्यकर्ता बैठक करते हैं.. यह सवाल बैठक के समाप्त होने के बाद कार्यकर्ता एक-दूसरे से पूछ रहे थे। 

कार्यकर्ताओं की घनघोर उपेक्षा, पुलिसिया उत्पीड़न, दरोगाओं की अवैध वसूली यदि इसी तरह जारी रही तो फिर आने वाला समय सत्तारुढ़ पार्टी के लिए भयंकर चुनौतियों वाला साबित होगा। 

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