स्वतंत्रता सेनानी रामसनेही की डाइनामाइट न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत

डीएन संवाददाता

डाइनामाइट न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान स्वतंत्रता सेनानी रामसनेही ने बताया कि उन्होंने भी अंग्रेजों की गुलामी झेली थी और उस दौर की कड़वी यादे आज भी उनके जहन में जिंदा है।

स्वतंत्रता सेनानी रामसनेही से डाइनामाइट न्यूज़  की  एक्सक्लूसिव बातचीत
स्वतंत्रता सेनानी रामसनेही से डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव बातचीत

फतेहपुर: भारत को स्वतंत्र हुए आज 71 वर्ष हो गए हैं। अग्रेजों के गुलाम भारत को आज़ादी दिलाने में हमारे वीर सपूतों को कितना कष्ट सहना पड़ा। देशभक्त जिनकी बदौलत हम इस स्वतन्त्र हवा में श्वास ले पा रहे हैं। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी है फ़तेहपुर के बिंदकी तहसील के रहने वाले रामसनेही।

डाइनामाइट न्यूज़ से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन्होंने भी अंग्रोजी की गुलामी झेली थी और उस दौर की कड़वी यादे आज भी उनके जहन में जिंदा है। उन्होंने बताया उस समय उनकी उम्र 14-15 साल की थी। नाबालिग होने पर भी उन्हें 6 माह जेल की सजा कटनी पड़ी। आगे उन्होंने बताया कि आज़ादी दिलाने में हम देश भक्तों का बड़ा योगदान रहा है। बहुत कष्टों के बाद हमे ये दिन देखने को मिला है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फ़तेहपुर जिलाधिकारी मदनपाल आर्य ने उन्हें कलेक्टरेट परिसर के गांधी सभागार में सम्मानित किया। इस अवसर पर बिंदकी तहसील के स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ खन्ना और स्व0 स्वतंत्रता सेनानी रामगोपाल तिवारी की पत्नी शिवदेवी को भी सम्मानित किया गया।

केंद्र नहीं दे रहा है स्वतंत्रता सेनानी पेंशन: रामसनेही

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट परिसर के गांधी सभागार में जिलाधिकारी मदनपाल आर्य से सम्मानित होने के बाद स्वतंत्रता सेनानी रामसनेही ने सम्बोधन के दौरान कहा कि उन्होंने कहा हम लोगो ने भारत को स्वतंत्र करने में अपना योगदान दिया है। इतना कष्ट हम लोगों को मिला है और आज हमारी ये दशा है। शासनादेश होने के बावजूद हमें केंद्र सरकार पेंशन नहीं दे रही है। आज के दिन लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री बोल रहे होंगे लेकिन उन्हें स्वतंत्रता दिलाने वाले हम जैसे सेनानियों जरा भी ध्यान नहीं है।

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