
नोएडा: कानपुर के बाद अब गौतमबुद्धनगर में भी कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला सामने आया है। बीटेक छात्र सोमेश गौतम को मुठभेड़ में गोली मारने के मामले में नोएडा के जेवर थाने में पूर्व SHO समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई का आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दिया था।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, यह मामला सितंबर 2022 का है। जब मथुरा निवासी तरुण गौतम और उनके बेटे सोमेश को पुलिस ने उनके घर से उठाया था। तरुण गौतम का आरोप है कि पुलिस ने हत्या के एक मामले में उन्हें और उनके बेटे को अवैध रूप से हिरासत में लिया, टॉर्चर किया और फिर मुठभेड़ का नाटक कर बेटे के पैर में गोली मार दी।
तीन साल तक लड़ी कानूनी लड़ाई
तरुण गौतम ने इस फर्जी मुठभेड़ का खुलासा करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और तीन साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उन्होंने पुलिस द्वारा घर से हिरासत में लिए जाने की सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश की, जो अहम सबूत साबित हुई। इस फुटेज में पुलिसकर्मी बाप-बेटे को जबरन कार में ले जाते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो तरुण ने मीडिया के साथ भी साझा किया है।
6 सितंबर 2022 की रात हुई थी कथित फर्जी मुठभेड़
तरुण के अनुसार, 6 सितंबर की रात पुलिस ने उनके बेटे की आंखों पर पट्टी बांधी, हाथ पीछे बांधे और एक अज्ञात स्थान पर ले जाकर मुठभेड़ का नाटक किया। वहीं पर उसके पैर में गोली मार दी गई और फिर गिरफ्तारी दिखाकर उसके पास से एक बाइक और पिस्टल की बरामदगी भी दिखाई गई।
जबरन वसूली और धमकियों का आरोप
तरुण का दावा है कि बेटे को छोड़ने के एवज में पुलिस ने एक लाख रुपये की मांग की थी, जिसे परिजनों ने किसी तरह जुटाकर उन्हें छुड़ाया। साथ ही आरोप लगाया कि पुलिस ने उन पर चुप रहने का दबाव बनाया और जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान पुलिस ने सोमेश पर कई फर्जी मुकदमे दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट भी लगा दिया।
हिस्ट्रीशीटर नागेश की हत्या से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला 1 सितंबर 2022 को जेवर थाना क्षेत्र के नीमका गांव में हुई हिस्ट्रीशीटर नागेश की हत्या से जुड़ा है। नागेश को कुख्यात सुंदर भाटी गैंग का सदस्य बताया गया था। उसकी हत्या के मामले में सोमेश गौतम समेत कई युवकों पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया था।
CBCID जांच की मांग
पीड़ित के वकील सीपी गौतम ने कहा है कि वे इस मामले की स्वतंत्र जांच के लिए CBCID का रुख करेंगे। उनका आरोप है कि स्थानीय स्तर पर जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए मामला CBCID को सौंपा जाना चाहिए।
Published : 10 April 2025, 10:55 AM IST
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