
बलरामपुर: जंगल से कीमती खैर की लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी करने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरफ्तारी लंबे समय से फरार चल रहे तस्करों की तलाश के बाद की गई है।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के अनुसार पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी जनवरी से फरार चल रहे थे। पुलिस लगातार उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही थी।
ऐसे हुआ खुलासा
एसपी ने बताया कि वन रक्षक इकाई तुलसीपुर विद्यासागर की शिकायत पर कार्रवाई शुरू की गई थी। 28 जनवरी को एसएसबी टीम ने सिरिया नाले के पास एक पिकअप और एक स्कॉर्पियो वाहन को पकड़ा था। स्कॉर्पियो चालक मौके से भाग गया था, लेकिन वाहनों से कुल 11 खैर की लकड़ियां बरामद की गई थीं। इस मामले में शंकरलाल समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम और वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी
शनिवार को पुलिस ने फरार श्रीमन नारायण शुक्ला उर्फ पिंटू शुक्ला और गुड्डू पांडे को गनवरिया तिराहा से गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन और 12,450 रुपये नकद बरामद किए गए। श्रीमन नारायण पर 25,000 रुपये और गुड्डू पांडे पर 15,000 रुपये का इनाम घोषित था। एसपी ने बताया कि इस गिरोह के कुल 12 सदस्य पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें बारहवां रेंज का रेंजर भी शामिल है।
15 साल से चल रहा था अवैध कारोबार
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे पिछले 15 साल से खैर की लकड़ी का अवैध कारोबार कर रहे थे। यह कारोबार वन विभाग के रेंजर राकेश पाठक और अन्य वन कर्मियों की मिलीभगत से चल रहा था। चरनगहिया गांव में अन्नू सिंह के बगीचे में लकड़ी की थोक दुकान स्थापित थी, जहां शंकर मुंशी को मैनेजर बनाया गया था।
लकड़ी काटने, उसे इकट्ठा करने और बाजार तक पहुंचाने में अनूप शुक्ला, सुहैल मिस्त्री, विमल पांडेय उर्फ बोस पांडेय और कलम बाबा जैसे लोग शामिल थे। चोरी की गई लकड़ी को ट्रकों के जरिए हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भेजा जाता था, जहां उसे 6500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा जाता था। पुलिस अब पूरे गिरोह के नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य संभावित साथियों की तलाश जारी है।
Published : 5 April 2025, 7:34 PM IST
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