
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने बुधवार, 6 नवंबर को बुलडोजर चलवाकर अवैध तरीके से मकान गिराये जाने के 5 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला (Historic Verdict) सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने देश के वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश के लेटर पटिशन का स्वत: संज्ञान लेने के बाद बुलडोजर एक्शन के खिलाफ यह फैसला सुनाया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार मनोज टिबड़ेवाल आकाश की याचिका पर शीर्ष कोर्ट का यह फैसला देश के लिए नजीर बन गया है। इस फैसले के कारण देश के ऐसे लाखों लोगों में न्याय की नई उम्मीद भी जग गई है, जिनका मकान अवैध तरीके से बुलडोजर चलवाकर बिना कोई नोटिस दिये ढ़हा दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सुर्खियों में बना हुआ है। इस फैसले पर देश भर में हो रही चर्चाओं के बीच बुलडोजर एक्शन के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले मनोज टिबड़ेवाल आकाश के पास बुलडोजर आतंक का शिकार बने कई लोगों के फोन आ रहे हैं।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मनोज टिबड़ेवाल आकाश को उनके मोबाइल और डाइनामाइट न्यूज़ ऑफिस कै लैंडलाइन पर फोन आने का सिलसिला जारी है।
फोन पर लोग मनोज को बुलडोजर एक्शन के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ने और ऐतिहासिक जीत हासिल करने के लिये बधाई दे रहे हैं। इन सभी लोगों को मानना है कि मनोज टिबड़ेवाल ने एक तरह से उनकी भी लड़ाई लड़ी क्योंकि उनका घर भी बिना नोटिस दिये के बुलडोजर चलवाकर अवैध तरीके से तोड़ा गया।
इन लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद उनमें भी न्याय की उम्मीद जगी है। इसके लिये वे मनोज से उनका मार्गदर्शन करने का आग्रह कर रहे हैं। मनोज भी ऐसे लोगों को यथासंभव जानकारी व सलाह देने के साथ उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।
मनोज के पास अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा (पंचकुला), राजस्थान और उत्तराखंड से सबसे ज्यादा फोन आये।
मनोज की याचिका पर आये फैसले से देश में लोगों का कानून पर भरोसा बढ़ गया। बुलडोजर कार्रवाई के पीड़ित लोग अब अन्याय के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे है।
Published : 10 November 2024, 12:20 PM IST
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