
तिरूपति: सिद्धगुरु सिद्धेश्वर ब्रह्मऋषि गुरुदेव, तिरुपति ने ब्रह्मश्रि आश्रम तिरूपति में प्रवचन के दौरान भक्तों पर अद्भुत अमृत वर्षा की और आम आदमी के जीवन में अष्टलक्ष्मी के महत्व को समझाया। ब्रह्मर्षि गुरुदेव ने कहा कि 14 दिसंबर से 22 दिसंबर तक यहां श्री अष्टलक्ष्मी महायज्ञ का दिव्य और भव्य आयोजन किया जायेगा, जिसमें शामिल होकर हर भक्त और उसका परिवार परामात्मा तक की संपूर्ण यात्रा कर सकेगा।
इस विशेष अवसपर सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव गुरुवानंद ने भक्तों को अष्टलक्ष्मी के स्वरूप और उसके महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि अष्टलक्ष्मी के हर रूप की व्यक्ति के जीवन में अपार क़ृपा होती है।
उन्होंने कहा कि अष्टलक्ष्मी महायज्ञ पर यहां अष्ट देव दिवस का आयोजन होगा। दिसंबर के इस महायज्ञ में लक्ष्मी जी पूर्ण शक्तियों में रहेंगी। उसी समय लक्ष्मी का भी मिलन होगा। इसलिये यहां उसका भव्य अनुष्ठान रखा गया है। पूजन और जाप रखा गया है। यह बड़ा और खास उत्सव होगा। उसी दौरान भक्तों के परिवार से परामात्मा तक की यात्रा पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि लक्ष्मी के आठ रूप होते, जिसे अष्टलक्ष्मी कहते हैं। इन आठों रूपों में आदि लक्ष्मी, वीरा लक्ष्मी, विजया लक्ष्मी, गजा लक्ष्मी, सौभाग्य लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, संतना लक्ष्मी शामिल हैं।
ब्रह्मर्षि गुरुदेव गुरुवानंद ने कहा कि इस जीवन में इंसान को जो भी प्राप्त होता है, वो लक्ष्मी जी से ही प्राप्त होता है। जीवन में कई चीजों के कई रास्ते हैं लेकिन जन्म लेने का एक ही रास्ता है और वो है मां। इसी तरह जीवन में सफल होने से लेकर राजा बनने तक का एक ही रास्ता है, वो है मां लक्ष्मी का। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी का पर्यायवाची शब्द ही मां है।
सिद्धेश्वर ब्रह्मर्षि गुरुदेव गुरुवानंद ने कहा कि लक्ष्मी ही हर व्यक्ति को धनवान और महान बनायेगी। उन्होंने कहा कि धनवान से लेकर भगवान बनना तक भी लक्ष्मी से ही संभव है। इसलिये हर संस्थाओं में अब अष्टलक्ष्मी का मंदिर बनना शुरू हो गया। क्योंकि हर किसी को अष्ट लक्ष्मी ही महान बनायेगी। उन्होंने हर भक्त को दिसंबर में महालक्ष्मी महायज्ञ में शामिल होने को कहा।
Published : 13 October 2024, 5:05 PM IST
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