
विराट की कप्तानी का सफर रहा खास (IMG: IANS)
New Delhi: भारतीय क्रिकेट में जब भी सफल कप्तानों की बात होती है, तो महेंद्र सिंह धोनी, सौरव गांगुली और विराट कोहली जैसे नाम जरूर सामने आते हैं। धोनी की कप्तानी में भारत ने टी-20 और वनडे विश्व कप सहित कई बड़ी ट्रॉफियां जीतीं। वहीं, विराट कोहली के नाम बतौर कप्तान कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं रही। इसके बावजूद टेस्ट क्रिकेट में उनकी कप्तानी को भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली दौर में गिना जाता है। आखिर ऐसा क्या था विराट की कप्तानी में, जिसने उन्हें टेस्ट क्रिकेट का खास कप्तान बनाया? इसका जवाब उनके रिकॉर्ड, विदेशी जमीन पर मिली जीत और मैदान पर दिखाई गई आक्रामकता में छिपा है।
अगस्त 2015 में भारतीय टीम श्रीलंका दौरे पर थी। तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का आखिरी मुकाबला निर्णायक बन चुका था। भारत पहला टेस्ट 63 रन से जीतने के बाद दूसरा मैच 278 रन से हार गया था। ऐसे में सीरीज बचाने की जिम्मेदारी विराट कोहली की टीम पर थी।
तीसरे टेस्ट में बारिश ने शुरुआती तीन दिनों तक खेल में बाधा डाली। इसके बावजूद भारतीय बल्लेबाजों ने पहली पारी में 312 रन बनाए। चेतेश्वर पुजारा ने शतक लगाया, जबकि अमित मिश्रा ने 59 रन का योगदान दिया। जवाब में श्रीलंका की टीम 201 रन पर सिमट गई और भारत को पहली पारी में 111 रन की बढ़त मिली।
दूसरी पारी में भारत ने 274 रन बनाकर श्रीलंका के सामने 374 रन का लक्ष्य रखा। मेजबान टीम की ओर से कप्तान एंजेलो मैथ्यूज ने शतक लगाया, लेकिन पूरी टीम 268 रन ही बना सकी। रविचंद्रन अश्विन ने चार और ईशांत शर्मा ने तीन विकेट लेकर भारत को 117 रन से जीत दिलाई। इस जीत के साथ भारत ने श्रीलंका की धरती पर 22 साल बाद टेस्ट सीरीज अपने नाम की। विदेशी जमीन पर 2011 के बाद यह भारत की पहली टेस्ट सीरीज जीत भी थी। यह जीत विराट की कप्तानी में भारतीय टेस्ट क्रिकेट के बदलते दौर की शुरुआत साबित हुई।
विराट की कप्तानी का असली अंदाज 2014-15 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर देखने को मिला। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के पहले टेस्ट में भारतीय टीम को आखिरी दिन जीत के लिए 364 रन का लक्ष्य मिला था। टीम मैनेजमेंट मैच बचाने के लिए ड्रॉ की रणनीति पर विचार कर रहा था, लेकिन विराट कोहली की सोच अलग थी। वह जीत के लिए खेलना चाहते थे।
मुरली विजय के साथ पारी को आगे बढ़ाने के बाद विराट ने आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी। विजय 99 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन विराट ने 141 रन की शानदार पारी खेली। भारतीय टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और मुकाबला 48 रन से हार गई। हालांकि, विराट की इस पारी ने यह साफ कर दिया कि वह किसी भी परिस्थिति में जीत के लिए खेलने का इरादा रखते हैं।
इसके बाद गाबा टेस्ट में भारत को हार मिली और मेलबर्न में तीसरा मुकाबला ड्रॉ रहा। मेलबर्न टेस्ट में विराट ने पहली पारी में शतक और दूसरी पारी में अर्धशतक लगाया। इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिचेल जॉनसन के साथ उनकी मैदान पर नोकझोंक भी चर्चा में रही। विराट का आक्रामक अंदाज और जवाबी बल्लेबाजी उस दौरे की खास पहचान बन गई।
ऐतिहासिक जीतों और रिकॉर्ड्स की कहानी (IMG: Pinterest)
मेलबर्न टेस्ट के बाद भारतीय क्रिकेट में बड़ा बदलाव हुआ। एमएस धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। इसके बाद विराट कोहली को टेस्ट टीम की पूरी जिम्मेदारी मिली। कप्तान के रूप में उन्होंने सिडनी में खेले गए चौथे टेस्ट की पहली पारी में भी शतक जड़ा। मुकाबला ड्रॉ रहा और भारत ने सीरीज 0-2 से गंवा दी।
हालांकि, इस सीरीज में विराट का बल्ला जमकर चला था। उन्होंने चार टेस्ट मैचों की आठ पारियों में 86.50 की औसत से 692 रन बनाए। वह ऑस्ट्रेलिया की धरती पर एक ही टेस्ट सीरीज में चार शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने।
उस समय विराट बल्लेबाजी के शानदार दौर से गुजर रहे थे, लेकिन भारतीय टेस्ट टीम की स्थिति अच्छी नहीं थी। टीम रैंकिंग में सातवें स्थान तक पहुंच गई थी। इससे पहले इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में भारत को 0-4 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। ऐसे में टीम को मजबूत बनाने और विदेशी मैदानों पर जीत का भरोसा लौटाने की बड़ी चुनौती विराट के सामने थी।
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श्रीलंका के खिलाफ मिली जीत के बाद भारतीय टेस्ट टीम ने लगातार बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया। 2016 में भारत ने वेस्टइंडीज को उसी की जमीन पर 2-0 से हराया। 2017 में श्रीलंका को उसके घर में 3-0 से टेस्ट सीरीज में शिकस्त दी।
लेकिन विराट की कप्तानी की सबसे बड़ी उपलब्धि साल 2018 में आई। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की जमीन पर 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया। यह पहला मौका था जब किसी भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती थी। विराट कोहली एशिया के ऐसे पहले कप्तान बने, जिनकी अगुवाई में किसी टीम ने ऑस्ट्रेलियाई धरती पर टेस्ट सीरीज अपने नाम की।
इसके बाद भारत ने 2019 में वेस्टइंडीज को फिर टेस्ट सीरीज में हराया। हालांकि, इस शानदार सफर में हार भी मिली। 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत को 1-4 और 2021 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1-2 से सीरीज गंवानी पड़ी। इन नतीजों के बावजूद विराट की कप्तानी में टीम ने विदेशी मैदानों पर जीतने का आत्मविश्वास हासिल किया।
विराट कोहली की कप्तानी में 2021 का इंग्लैंड दौरा भी भारतीय टेस्ट क्रिकेट के यादगार दौर में शामिल रहा। भारत ने लॉर्ड्स और ओवल जैसे ऐतिहासिक मैदानों पर शानदार जीत दर्ज की और पांच मैचों की सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली।
हालांकि, कोरोना संक्रमण के कारण सीरीज का पांचवां और आखिरी टेस्ट 2022 में खेला गया। इस मुकाबले में भारत को हार मिली और सीरीज 2-2 से ड्रॉ पर समाप्त हुई। इसके बावजूद इंग्लैंड में भारतीय टीम के प्रदर्शन ने विदेशी परिस्थितियों में उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता को दिखाया।
धोनी के बाद संभाली टेस्ट टीम की कमान (IMG: IANS)
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विराट कोहली की कप्तानी को केवल विदेशी मैदानों की जीत के आधार पर नहीं परखा जा सकता। घरेलू टेस्ट सीरीज में भी भारतीय टीम ने उनके नेतृत्व में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विराट की कप्तानी में भारत ने घरेलू मैदान पर लगातार 11 टेस्ट सीरीज जीतीं और इस दौरान कोई सीरीज नहीं गंवाई।
विराट ने 2021 में टेस्ट कप्तानी छोड़ने से पहले कुल 68 टेस्ट मैचों में भारत की अगुवाई की। इनमें टीम ने 40 मुकाबले जीते, 17 में हार मिली और 11 मैच ड्रॉ रहे। उनकी कप्तानी में भारत का जीत प्रतिशत करीब 60 रहा।
विराट कोहली की कप्तानी का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कितनी आईसीसी ट्रॉफियां जीतीं। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने भारतीय टीम की सोच और खेलने के तरीके को एक नई दिशा दी। तेज गेंदबाजों को मजबूत बनाने, फिटनेस पर जोर देने और विदेशी मैदानों पर जीत के लक्ष्य के साथ उतरने की उनकी सोच ने टीम की पहचान बदली।
यही वजह है कि बिना आईसीसी ट्रॉफी के भी विराट कोहली को भारतीय टेस्ट क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में गिना जाता है। उनके लिए कप्तानी सिर्फ मैच जीतने का नाम नहीं थी, बल्कि टीम को हर परिस्थिति में जीत के इरादे से खेलने के लिए तैयार करना भी था। क्रिकेट की दुनिया में 'चीकू' की यही पहचान उन्हें बाकी कप्तानों से अलग बनाती है।
Location : New Delhi
Published : 6 November 2026, 5:04 PM IST