Asian Games: सिंधु की मुराद पूरी, पर मनु भाकर की उम्मीदें टूटीं; क्या थी अर्जी और किसने लगाई रोक? जानिए पूरा सच!

एशियाई खेलों से पहले भारतीय दल के सपोर्ट स्टाफ में आखिरी समय पर कई बड़े बदलाव हुए, लेकिन मनु भाकर की सबसे अहम मांग क्यों नहीं मानी गई? सिंधू की फिजियो को हरी झंडी मिलने के बाद यह फैसला चर्चा का विषय बन गया है।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 4 September 2026, 10:16 AM IST

New Delhi: एशियाई खेलों के लिए भारतीय दल की तैयारियों के बीच सपोर्ट स्टाफ को लेकर कई अहम बदलाव किए गए हैं। पीवी सिंधु की निजी फिजियो हीरा मुंदलुरु को एशियाड दल में शामिल करने की अनुमति मिल गई है, जबकि निशानेबाज मनु भाकर की ओर से अपने पिता रामकिशन भाकर को साथ रखने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया गया। वहीं, कुश्ती और अन्य खेलों के कई विदेशी व निजी प्रशिक्षकों को अंतिम समय में दल में जगह मिली है।

एथलेटिक्स के सपोर्ट स्टाफ में भी बढ़ोतरी

एशियाई खेलों के लिए 77 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम के सपोर्ट स्टाफ की संख्या में इजाफा किया गया है। पहले जहां इसमें 23 सदस्य थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 31 हो गई है। पूरे भारतीय दल के 244 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ में 33 फिजियोथेरेपिस्ट, 22 डॉक्टर, वीडियो एनालिस्ट, 10 मालिशिए और तीन साइकोलॉजिस्ट शामिल हैं।

खिलाड़ियों की मांग पर निजी कोचों को मिली जगह

कुछ खिलाड़ियों की मांग को ध्यान में रखते हुए उनके निजी प्रशिक्षकों को भी दल में शामिल किया गया है। टेबल टेनिस खिलाड़ी सुतीर्था मुखर्जी और पायस जैन से जुड़े निजी कोच सौम्यदीप रॉय को मंजूरी दी गई है। वहीं, लांग जंपर शाहनवाज खान के कोच भूपिंदर सिंह और एंसी सोजन के कोच अनूप जोसेफ को भी भारतीय दल का हिस्सा बनाया गया है।

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सिंधू की गुहार पर साई ने बदला फैसला

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने एशियाई खेलों में अपनी फिजियो हीरा मुंदलुरु को साथ ले जाने की इच्छा जताई थी। बताया गया है कि बैडमिंटन महासंघ की ओर से उनका नाम नहीं भेजा गया था। इसके बावजूद सिंधू के अनुरोध पर भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने उन्हें दल में शामिल करने की मंजूरी दे दी।

कुश्ती के तीन विदेशी कोच भी दल में शामिल

कुश्ती के सपोर्ट स्टाफ में भी अंतिम समय पर बड़ा बदलाव हुआ। पहले भारतीय कुश्ती महासंघ की सूची में जापान की महिला कोच कोसेई अकाइशी, रूस के ग्रीको-रोमन कोच गोगी कोगुआशविली और फ्रीस्टाइल कोच शाको बेंटिनिडिस के नाम नहीं थे। बाद में मंत्रालय और SAI के हस्तक्षेप के बाद तीनों को एशियाई खेलों के दल में शामिल कर लिया गया।

मनु भाकर ने पिता को साथ रखने की मांग की थी

कोच जसपाल राणा के निधन के बाद मनु भाकर पहली बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रही हैं। ऐसे समय में उन्होंने मानसिक मजबूती और सहयोग के लिए अपने पिता रामकिशन भाकर को साथ रखने की इच्छा जताई थी। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की ओर से रामकिशन भाकर का नाम उनके निजी कोच के तौर पर प्रस्तावित किया गया था।

मंत्रालय और साई ने नहीं दी मंजूरी

मनु भाकर के पिता को निजी कोच के रूप में दल में शामिल करने के प्रस्ताव को खेल मंत्रालय और SAI की मंजूरी नहीं मिली। इस फैसले के बाद एशियाई खेलों में मनु के साथ उनके पिता के जाने का रास्ता बंद हो गया है। जसपाल राणा के निधन के बाद मनु के लिए यह टूर्नामेंट भावनात्मक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

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अंजू बॉबी जॉर्ज को भी नहीं मिली अनुमति

एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और पूर्व लंबी कूद खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज को टीम लीडर बनाए जाने का प्रस्ताव भी मंजूर नहीं किया गया। बताया गया है कि मंत्रालय के निर्धारित नियम इस फैसले में बाधा बने।

ईशा सिंह के पिता का नाम भी हुआ खारिज

निशानेबाज ईशा सिंह के पिता सचिन सिंह को भी निजी प्रशिक्षक के तौर पर एशियाई खेलों के दल में शामिल करने की अनुमति नहीं दी गई। ईशा, दिवंगत कोच जसपाल राणा की शिष्या रही हैं। ऐसे में उनके पिता को साथ रखने के अनुरोध को मंजूरी न मिलने का मामला भी चर्चा में है।

एशियाड से पहले सपोर्ट स्टाफ पर बड़ा बदलाव

एशियाई खेलों के लिए अंतिम चरण में जिस तरह कई खिलाड़ियों की मांग पर निजी कोच और विशेषज्ञों को जोड़ा गया है, उससे भारतीय दल के सपोर्ट सिस्टम में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, कुछ अनुरोधों को नियमों के चलते मंजूरी नहीं मिल सकी। अब खिलाड़ियों की नजर प्रतियोगिता में प्रदर्शन पर होगी।

Location :  New Delhi

Published :  4 September 2026, 10:14 AM IST