
बुधवार व्रत का महत्व और बुध ग्रह का संबंध (Img- Pinterest)
New Delhi: हिंदू सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और ग्रह को समर्पित है। इसी कड़ी में बुधवार का दिन प्रथम पूजनीय भगवान गणेश और नवग्रहों में शामिल बुध ग्रह की आराधना के लिए बेहद विशेष माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह को बुद्धि, विवेक, मधुर वाणी, व्यापार, शिक्षा और संचार का कारक माना गया है।
ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमपूर्वक बुधवार का व्रत रखता है, उसकी कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है। इसके शुभ प्रभाव से जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं और मानसिक शांति के साथ सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह जिज्ञासा रहती है कि बुधवार के कितने व्रत करने का विधान है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जीवन के कष्टों को दूर करने और मनोकामना पूर्ति के लिए बुधवार के 7, 11 या फिर 21 व्रत रखने का संकल्प लिया जाना चाहिए।
श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, शारीरिक क्षमता और समय के अनुसार इनमें से किसी भी संख्या का चयन कर सकते हैं। नियमित रूप से यह व्रत करने से विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति और बुद्धि में तीव्र वृद्धि होती है, जिससे उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में अपार लाभ मिलता है। वहीं, व्यापारियों को आर्थिक उन्नति और करियर में नए अवसर प्राप्त होते हैं।
बुधवार व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ कड़े और सात्विक नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है। व्रत रखने वाले जातक को बुधवार की सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
व्रत के दौरान पूरी तरह से सात्विक आचरण अपनाना चाहिए। मन में किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या, झूठ या नकारात्मक विचार नहीं लाने चाहिए। खान-पान की बात करें तो कई श्रद्धालु इस दिन केवल एक समय बिना नमक का सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जबकि कुछ लोग पूरे दिन फलाहार का पालन करते हैं।
बुधवार की पूजा विधि बेहद सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली है। सुबह घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। बप्पा को प्रिय दूर्वा (दूब घास), हरे रंग के फूल, सिंदूर, रोली और मोदक या लड्डू अर्पित करें। इसके बाद बुध देव का ध्यान करते हुए उन्हें हरी मूंग की दाल, हरे फल या हरे वस्त्र दान स्वरूप अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
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ॐ गं गणपतये नमः
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Location : New Delhi
Published : 23 June 2026, 2:54 PM IST