वास्तु गाइड: जीवन में सफलता और नशे से मुक्ति का जरिया, जानिए वरुण और शोष दिशा का खास रहस्य

वास्तु शास्त्र की इस खास सीरीज में जानिए वरुण और शोष दिशा का महत्व। इंटीरियर वास्तु कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल से समझें कि कैसे वरुण यंत्र और त्रिपुर भैरवी यंत्र की स्थापना से घर में खुशहाली और अच्छी आदतें लाई जा सकती हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 13 August 2026, 1:37 PM IST

New Delhi: वास्तु शास्त्र की हमारी विशेष सीरीज में आज हम बात कर रहे हैं दो बेहद महत्वपूर्ण दिशाओं 'वरुण' और 'शोष' के बारे में। घर या कार्यस्थल की दिशाएं न केवल हमारी सोच और आदतों को प्रभावित करती हैं, बल्कि जीवन की दिशा भी तय करती हैं।

प्रसिद्ध इंटीरियर वास्तु प्लानर और कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल के अनुसार, यदि इन दिशाओं को वास्तु नियमों के अनुरूप संतुलित किया जाए, तो जीवन में खुशहाली और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

वरुण दिशा: महत्वाकांक्षा और खुशहाली का स्रोत

वास्तु कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल बताती हैं कि 'वरुण दिशा' उन लोगों के लिए बेहद शुभ और फलदायी मानी जाती है जो जीवन में पूर्णता (Perfectionism) पसंद करते हैं। यह दिशा व्यक्ति के भीतर ऊंची महत्वाकांक्षाएं जगाती है, जिससे करियर और बिजनेस में तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं।

इसके अलावा, यह स्थान उत्तम भाग्य और परिवार में खुशहाल माहौल बनाए रखने में मदद करता है। यदि आप अपने जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि बढ़ाना चाहते हैं, तो इस दिशा में 'वरुण यंत्र' की स्थापना करना अत्यंत लाभदायक होता है।

शोष दिशा: आदतों पर नियंत्रण और त्रिपुर भैरवी यंत्र का महत्व

सीरीज को आगे बढ़ाते हुए रानी टिबड़ेवाल ने 'शोष दिशा' के गहरे असर के बारे में जानकारी दी। वास्तु विज्ञान के अनुसार, शोष दिशा नकारात्मक प्रवृत्तियों और किसी भी तरह की नशे की लत से जुड़ी होती है। यदि घर की इस दिशा में वास्तु दोष हो, तो परिवार के सदस्यों में बुरी आदतें या नशे की प्रवृत्ति पनपने का खतरा रहता है।

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इस नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करने के लिए इस स्थान पर 'त्रिपुर भैरवी यंत्र' स्थापित करने की सलाह दी जाती है। यह यंत्र घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है।

Location :  New Delhi

Published :  13 August 2026, 1:37 PM IST