
अधिकमास की वरद चतुर्थी (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: वरद चतुर्थी का पावन पर्व आज 20 मई, बुधवार को मनाया जा रहा है। यह तिथि अधिकमास में आने के कारण और भी विशेष मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए अत्यंत शुभ होता है।
वरद चतुर्थी को Lord Ganesha की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है और जीवन के विघ्न दूर होते हैं।
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धार्मिक परंपराओं के अनुसार वरद चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से झूठे आरोप या मिथ्या दोष लग सकते हैं। इसलिए श्रद्धालुओं को इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी जाती है।
जानकारी के अनुसार चतुर्थी तिथि 19 मई दोपहर 02:18 बजे से शुरू होकर 20 मई सुबह 11:06 बजे समाप्त हो गई। उदयातिथि के अनुसार यह पर्व आज 20 मई को ही मनाया जा रहा है। व्रतधारकों के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार बुधवार, 20 मई को रात 11 बजकर 08 मिनट तक चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी गई है। इस अवधि में चंद्रमा को देखना धार्मिक रूप से अशुभ माना गया है और इससे दोष लग सकता है।
अगर किसी कारणवश गलती से चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। शास्त्रों के अनुसार ऐसी स्थिति में ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए या फिर ‘स्यमंतक मणि’ की कथा सुननी चाहिए। इससे संभावित दोष का निवारण माना जाता है।
वरद चतुर्थी व्रत में चंद्रमा की पूजा का कोई महत्व नहीं होता। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करते हैं। इस नियम का पालन करना धार्मिक दृष्टि से आवश्यक माना गया है।
Location : New Delhi
Published : 20 May 2026, 10:43 AM IST