‘वह संन्यासी रावण निकला…’ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के इस तीखे बयान ने सियासी और धार्मिक गलियारों में क्यों मचाई खलबली?

अलीगढ़ पहुंचे ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बिना नाम लिए तीखा तंज कसा। उन्होंने हिंदुओं की स्थिति की तुलना माता सीता से करते हुए कहा कि जिसे संन्यासी समझा, वह रावण निकला। उन्होंने हिंदुओं को सीता की बजाय हनुमान बनने की सलाह दी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 June 2026, 4:41 PM IST

Aligarh: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में शनिवार शाम रामघाट रोड स्थित एक गेस्ट हाउस में आयोजित स्वागत कार्यक्रम के दौरान धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई। गविष्ट (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा लेकर जिले के दो दिवसीय दौरे पर आए ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जनता को संबोधित करते हुए एक ऐसा बयान दिया, जिसने सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मौजूदा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। शंकराचार्य ने कहा कि एक हिंदू का सबसे पहला कर्तव्य अपने धर्म और गाय की रक्षा करना है, लेकिन आज के दौर में रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

'संन्यासी समझा पर वह निकला...'

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देश के हिंदुओं की वर्तमान स्थिति की तुलना रामायण काल की माता सीता से कर दी। उन्होंने भावुक और आक्रामक लहजे में कहा, "आज हिंदुओं की हालत माता सीता के जैसी हो गई है। माता सीता ने कुटिया के बाहर खड़े जिस व्यक्ति को संन्यासी समझा, उसे फल-फूल खिलाए और उसका आशीर्वाद लेना चाहा, वही संन्यासी उनकी कलाई पकड़कर घसीटकर ले जाने लगा और बाद में वह रावण निकला।" उन्होंने आगे कहा कि अब संन्यासी, संन्यासी नहीं बचा है और हमारे पास केवल विलाप करने के अलावा कुछ नहीं रह गया है।

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माता सीता नहीं, अब हनुमान बनने की जरूरत

अपने संबोधन में शंकराचार्य ने हिंदुओं को जागृत होने का संदेश देते हुए कहा कि अब परिस्थितियों को बदलने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, "हमारे हनुमान जी ने कालनेमी के साथ ऐसा नहीं किया था। जब उनके सामने कालनेमी संन्यासी का रूप धरकर आया, तो हनुमान जी ने आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया। उन्होंने पहले उसका आचरण देखा और जैसे ही उसका निशाचर (राक्षस) रूप सामने आया, उसे पटककर उसका अंत कर दिया।" उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि गुरु होने के नाते वह सबके दरवाजे पर यह कहने आए हैं कि अब माता सीता बनकर धोखा खाने की जरूरत नहीं है, बल्कि विश्वास के मामले में हनुमान बनने की आवश्यकता है।

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गौ रक्षा के मुद्दे पर घेरा

शंकराचार्य की यह गविष्ट यात्रा मुख्य रूप से गौ माता की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के संकल्प के साथ निकाली जा रही है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि संन्यासी वेषधारी नेताओं के राज में भी गायों की दशा सुधर नहीं रही है। इस तीखे बयान के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।

Location :  Aligarh

Published :  14 June 2026, 4:41 PM IST