
सावन पुत्रदा एकादशी (Img- Pinterest)
New Delhi: श्रावण मास की अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण 'सावन पुत्रदा एकादशी' की तारीख को लेकर इस बार श्रद्धालुओं के बीच बड़ा असमंजस बना हुआ है। पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल एकादशी तिथि 23 अगस्त को तड़के 02:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 04:18 बजे तक रहेगी।
हालांकि, केवल उदयातिथि ही नहीं, बल्कि एकादशी के व्रत में 'हरिवासर' की भूमिका सबसे अहम होती है। 24 अगस्त को सुबह 10:49 बजे तक हरिवासर रहेगा, जिसके समाप्त होने से पहले व्रत का पारण नहीं किया जा सकता। इसी वजह से यह व्रत दो अलग-अलग दिनों में बंट गया है।
शास्त्रों के नियमों के अनुसार, तिथि और हरिवासर के इस संयोग को देखते हुए गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग 23 अगस्त को व्रत रखेंगे। वहीं, वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए 24 अगस्त को व्रत रखना शास्त्रसम्मत माना गया है।
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यदि वैष्णव 23 अगस्त को व्रत रखते, तो अगले दिन हरिवासर के कारण वे सूर्योदय के बाद पारण नहीं कर पाते और उनका व्रत 48 घंटे लंबा हो जाता। इसलिए गृहस्थों के लिए 23 अगस्त और वैष्णव जनों के लिए 24 अगस्त का दिन तय हुआ है।
23 अगस्त को व्रत रखने वालों के लिए पूजा का मुख्य मुहूर्त सुबह 07:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक रहेगा। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:58 से 12:49 बजे तक उपलब्ध है।
वहीं, 24 अगस्त को पूजन का समय सुबह 05:55 से 07:32 बजे तक और फिर सुबह 09:09 से 10:46 बजे तक रहेगा। 23 अगस्त को शाम 05:15 से 06:53 बजे तक तथा 24 अगस्त को सुबह 07:32 से 09:09 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित हैं।
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23 अगस्त को व्रत रखने वाले गृहस्थ 24 अगस्त को दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे के बीच पारण करेंगे। 24 अगस्त को व्रत रखने वाले वैष्णव जन 25 अगस्त को सुबह 05:55 बजे से 06:20 बजे के बीच ही पारण कर सकेंगे, क्योंकि इसके बाद द्वादशी तिथि समाप्त हो जाएगी। यह व्रत उत्तम संतान की प्राप्ति, बच्चों की उन्नति और जीवन में पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
Location : New Delhi
Published : 18 August 2026, 10:19 AM IST