Navratri Special: नवरात्रि में घर की इन 3 चीजों का रखें खास ध्यान, वरना रुठ जाएगी माता रानी

नवरात्रि के पावन पर्व पर पूजा के दौरान अखंड ज्योति की सही दिशा, मां लक्ष्मी के चरण चिह्न और मुख्य द्वार पर तोरण-स्वास्तिक लगाने का विशेष महत्व है। जानिए वास्तु और धर्म से जुड़े इन जरूरी नियमों के बारे में जो आपके घर में सुख-समृद्धि लाएंगे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 13 October 2026, 12:41 PM IST

New Delhi: नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और आज इसका तीसरा दिन है। इस पावन अवसर पर पूजा के दौरान अखंड ज्योति की सही दिशा, मां लक्ष्मी के चरण चिह्न और मुख्य द्वार पर तोरण-स्वास्तिक लगाने का विशेष महत्व है, जो घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं। इन नियमों का पालन करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर का माहौल पूरी तरह से पवित्र व मंगलमय बना रहता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि अखंड ज्योति, माता लक्ष्मी के चरण और तोरण का सही नियम क्या है।

अखंड ज्योति रखने की सही दिशा और नियम

नवरात्रि के पावन पर्व पर घरों में मां दुर्गा की आराधना के साथ अखंड ज्योति जलाने की परंपरा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण को अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है, इसलिए पूजा स्थल के दक्षिण-पूर्व हिस्से में दीपक रखना बेहद शुभ माना जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि दीपक हमेशा सुरक्षित, स्थिर और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर हो तथा अखंड ज्योति के लिए लगातार निगरानी रखनी आवश्यक है।

 

मुख्य द्वार पर माता लक्ष्मी के चरण क्यों बनाए जाते हैं?

घर के मुख्य द्वार से अंदर की ओर माता लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरण चिह्न बनाना उनके स्वागत और घर में बरकत आने का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे माता लक्ष्मी का आगमन होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है जो सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और परिवार के सदस्यों के लिए आर्थिक संपन्नता के द्वार खोलती है।

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द्वार पर तोरण और स्वास्तिक लगाने की मान्यता

नवरात्रि के शुभ अवसर पर घर के मुख्य द्वार को सजाने के लिए आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाना बहुत शुभ माना जाता है, जो हरियाली और सकारात्मक वातावरण का प्रतीक है। वहीं, मुख्य द्वार पर रोली, हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाना मंगल और समृद्धि लाता है। पारंपरिक रूप से इन पवित्र चिह्नों के प्रयोग से घर में नकारात्मक शक्तियां रुकती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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पूजा के लिए कौन सी दिशा है सबसे उत्तम?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण पूजा-पाठ के लिए सबसे उत्तम और पवित्र माना जाता है। इसी कारण इस दिशा में माता की चौकी और कलश स्थापित करने की विशेष सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि पूजा का स्थान हमेशा साफ, शांत, व्यवस्थित और पवित्र होना चाहिए ताकि मानसिक शांति मिले।

Location :  New Delhi

Published :  13 October 2026, 12:41 PM IST