Hanuman Jayanti 2026: भारत के अनोखे मंदिर की कहानी, जहां होती है हनुमान और उनकी पत्नी सुवर्चला की पूजा

तेलंगाना के इस अनोखे मंदिर में हनुमान जी को ब्रह्मचारी नहीं, बल्कि पत्नी सुवर्चला के साथ पूजा जाता है। जानिए इस रहस्यमयी कथा, विवाह की मान्यता और हनुमान जयंती पर होने वाले खास अनुष्ठानों के बारे में।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 31 March 2026, 12:48 PM IST

Delhi: भारत में हनुमान को बाल ब्रह्मचारी के रूप में पूजा जाता है। उनकी छवि एक ऐसे तपस्वी, वीर और भक्त की है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रभु राम की सेवा में समर्पित कर दिया। लेकिन इस परंपरागत धारणा के बीच एक ऐसा अद्भुत और कम चर्चित सत्य भी है, जो कई लोगों को चौंका देता है- देश में एक ऐसा मंदिर भी है, जहाँ हनुमान जी की पूजा उनकी पत्नी सुवर्चला देवी के साथ की जाती है।

कहां है यह अनोखा मंदिर?

यह रहस्यमयी और अनोखा मंदिर श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर में स्थित है। यह मंदिर तेलंगाना के खम्मम जिले के एलंदु नामक स्थान पर बना हुआ है। वर्ष 2006 में स्थापित यह मंदिर न केवल दक्षिण भारत, बल्कि पूरे देश में अपनी तरह का इकलौता माना जाता है।

यहाँ भक्त हनुमान जी को अकेले नहीं, बल्कि सुवर्चला देवी के साथ एक दिव्य युगल के रूप में पूजते हैं। यही विशेषता इस मंदिर को अन्य सभी हनुमान मंदिरों से अलग और अद्वितीय बनाती है।

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क्यों अनोखा है यह हनुमान-सुवर्चला मंदिर?

सामान्यतः हनुमान जी को ब्रह्मचारी माना जाता है और अधिकांश धार्मिक ग्रंथों में भी उनका यही स्वरूप वर्णित है। लेकिन इस मंदिर की मान्यता एक अलग कथा पर आधारित है, जो सूर्य देव से जुड़ी हुई है।

कथाओं के अनुसार, हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। सूर्य देव के पास नौ दिव्य विद्याएँ थीं, जिन्हें सीखने की इच्छा हनुमान जी ने जताई। लेकिन उन विद्याओं में से चार ऐसी थीं, जिन्हें केवल विवाहित शिष्य ही ग्रहण कर सकते थे।

हनुमान जी और उनकी पत्नी सुवर्चला की पूजा (फोटो सोर्स- इंटरनेट)

इस स्थिति में सूर्य देव ने एक समाधान सुझाया- उन्होंने अपनी पुत्री सुवर्चला के साथ हनुमान जी का विवाह करा दिया। यह विवाह सांसारिक नहीं, बल्कि केवल ज्ञान प्राप्ति के उद्देश्य से हुआ था। विवाह के बाद भी दोनों ने अपने-अपने तप और ब्रह्मचर्य का पालन किया।

यही कथा इस मंदिर की नींव है और इसी कारण यहाँ हनुमान जी को उनकी पत्नी के साथ पूजा जाता है। यह परंपरा भक्तों के लिए आस्था और जिज्ञासा दोनों का विषय बनती है।

हनुमान जयंती पर कैसे होती है पूजा?

हनुमान जयंती के अवसर पर इस मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिन हनुमान जी और सुवर्चला देवी का संयुक्त रूप से अभिषेक किया जाता है।

सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। पुजारी विशेष मंत्रों के साथ दोनों की आरती करते हैं और उन्हें सिंदूर, चोला, फूल और प्रसाद अर्पित किया जाता है। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि पूजा में "दंपत्ति स्वरूप" का विशेष महत्व होता है।

इसके अलावा, ज्येष्ठ शुद्ध दशमी के दिन हनुमान-सुवर्चला विवाह उत्सव भी मनाया जाता है, जिसमें भगवान के विवाह का प्रतीकात्मक आयोजन किया जाता है। यह आयोजन भक्तों के लिए बेहद आकर्षक और आध्यात्मिक अनुभव होता है।

क्या यहाँ विशेष अनुष्ठान होते हैं?

हाँ, इस मंदिर में कई विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जो इसे और भी खास बनाते हैं।

  • विवाह बाधा दूर करने के लिए विशेष पूजन
  • रोजगार और व्यापार में वृद्धि के लिए हनुमान-सुवर्चला युगल की आराधना
  • संयुक्त अभिषेक और यज्ञ
  • मंगल दोष और ग्रह बाधा निवारण के लिए विशेष हवन

ऐसी मान्यता है कि जो भी श्रद्धा से यहाँ पूजा करता है, उसके जीवन की बाधाएँ दूर हो जाती हैं। खासतौर पर विवाह से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए यह मंदिर प्रसिद्ध है।

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क्या भक्त हनुमान जयंती पर दर्शन कर सकते हैं?

जी हाँ, हनुमान जयंती के दौरान इस मंदिर में दर्शन करना न केवल संभव है, बल्कि अत्यंत शुभ भी माना जाता है। इस दिन दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। मंदिर प्रशासन विशेष व्यवस्था करता है ताकि भक्त सुगमता से दर्शन कर सकें। हालांकि भीड़ अधिक होती है, लेकिन श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ भगवान के दर्शन करते हैं।

यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा के विविध रूपों का प्रतीक है। जहाँ एक ओर हनुमान जी का ब्रह्मचारी स्वरूप पूजनीय है, वहीं यहाँ उनका एक अलग, ज्ञान-प्राप्ति से जुड़ा रूप देखने को मिलता है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 31 March 2026, 12:48 PM IST