गणगौर पूजा 2026: 21 मार्च को मनाया जाएगा पावन पर्व, जानिए व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

गणगौर पूजा 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि यहाँ जानें। 21 मार्च को मनाए जाने वाले इस महापर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से कैसे मिलता है अखंड सौभाग्य और मनचाहा वर, पढ़ें पूरी रिपोर्ट और पौराणिक कथा

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 17 March 2026, 4:54 PM IST

New Delhi: हिंदू धर्म में गणगौर का पर्व अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में गणगौर पूजा 21 मार्च को मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन महिलाएं व्रत रखकर माता गौरी और ईसर जी (भगवान शिव) की पूजा करती हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा और नियम के साथ इस व्रत का पालन करने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है, जबकि अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है।

कब है गणगौर पूजा 2026 की तिथि?

हिंदू पंचांग के अनुसार गणगौर का पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।

  • तृतीया तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2026, सुबह 2:30 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च 2026, रात 11:55 बजे

पूजा का शुभ मुहूर्त

  • सुबह 7:55 बजे से 9:26 बजे तक

इस समय में पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

18 मार्च को दर्श अमावस्या: पूरे दिन रहेगा पंचक का प्रभाव, जानें पूजा का महत्व और मुहूर्त

क्यों किया जाता है गणगौर व्रत

गणगौर व्रत को दांपत्य जीवन के सुख और सौभाग्य से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा से कई शुभ फल प्राप्त होते हैं।

  • पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है
  • दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है
  • अविवाहित कन्याओं को योग्य और मनचाहा वर प्राप्त होता है
  • परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है

इसी कारण से यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किन राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है यह पर्व

गणगौर का त्योहार भारत के कई राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में इसका विशेष महत्व है। राजस्थान में तो यह पर्व एक बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यहां होलिका दहन के बाद से ही गणगौर उत्सव की शुरुआत हो जाती है और यह लगभग 18 दिनों तक चलने वाला पारंपरिक उत्सव माना जाता है। अंतिम दिन भव्य शोभायात्राएं और लोकगीतों के साथ पूजा का समापन किया जाता है।

गणगौर पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी पर भ्रमण करने आए। उस समय गांव की महिलाओं ने पूरे श्रद्धा भाव से माता पार्वती की पूजा की।महिलाओं की भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने उन्हें सुखी दांपत्य जीवन और सौभाग्य का आशीर्वाद दिया। तभी से महिलाओं के बीच गणगौर व्रत और पूजा की परंपरा प्रचलित हो गई।

‘गद्दारी’ का खेल: वोटिंग में पलटी चाल, ओडिशा में कांग्रेस ने बागियों पर गिराई गाज

गणगौर पूजा की सरल विधि

गणगौर के दिन महिलाएं विशेष रूप से माता गौरी और ईसर जी की पूजा करती हैं। पूजा के दौरान कुछ पारंपरिक नियमों का पालन किया जाता है।

पूजा विधि इस प्रकार है

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर में भगवान शिव और माता गौरी की मिट्टी या लकड़ी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • माता गौरी को सिंदूर, हल्दी, कुमकुम, मेहंदी, फूल और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • गुड़, गेहूं और विभिन्न मिठाइयों का भोग लगाएं।
  • गणगौर व्रत की कथा सुनें और आरती करें।

इस अवसर पर महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और कई जगहों पर गणगौर की शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है गणगौर

गणगौर केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उत्सव भी है। यह पर्व पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण हर साल महिलाएं पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ इस व्रत का पालन करती हैं और भगवान शिव-पार्वती से अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 17 March 2026, 4:54 PM IST