
प्रदोष व्रत (Img: Google)
New Delhi: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि विधि-विधान से प्रदोष व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस बार अधिक मास के पहले प्रदोष व्रत की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है कि यह 27 मई को होगा या 28 मई को।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 मई 2026 को सुबह 7 बजकर 56 मिनट पर शुरू होगी और 29 मई 2026 को सुबह 9 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू परंपरा में व्रत और त्योहार उदया तिथि के आधार पर मनाए जाते हैं। चूंकि 28 मई को सूर्योदय के समय त्रयोदशी तिथि रहेगी, इसलिए अधिक मास का पहला प्रदोष व्रत 28 मई 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन को गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
प्रदोष व्रत में संध्या काल यानी प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव और माता पार्वती कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान रहते हैं। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
गुरुवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत गुरु प्रदोष कहलाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से गुरु दोष कम होता है और जीवन में ज्ञान, सम्मान और सुख-समृद्धि बढ़ती है। यह व्रत विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने, संतान सुख प्राप्त करने और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।
अमेठी में धर्मकांटा पर सो रहे चौकीदार को ट्रक ने कुचला, दर्दनाक मौत से मचा हड़कंप
अधिक मास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है, लेकिन इस दौरान भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि अधिक मास में किए गए व्रत, दान और पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है।
इसलिए अधिक मास का पहला प्रदोष व्रत भक्तों के लिए बेहद खास माना जा रहा है, जो आध्यात्मिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
Location : New Delhi
Published : 24 May 2026, 10:39 AM IST