Punjab Politics: दिल्ली हारने के बाद AAP का बड़ा दांव, 2027 में क्या होगा?

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं। सत्ता में वापसी के लिए आम आदमी पार्टी ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। संगठन से लेकर चुनावी चेहरे तक कई स्तरों पर तैयारियां चल रही हैं। लेकिन इस बार पार्टी के सामने चुनौती पहले से अलग है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 29 August 2026, 10:27 AM IST

Punjab: साल 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता में दोबारा वापसी की है। दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद पंजाब को अपने पास बनाए रखना आप के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को ही चुनावी रणनीति के केंद्र में रखने की तैयारी की है। राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पहले ही भगवंत मान को अगली सरकार के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुके हैं। ऐसे में आगामी चुनाव में पार्टी की रणनीति और प्रचार का बड़ा दारोमदार मान पर ही रहने वाला है।

संगठन को मजबूत करने पर जोर

चुनाव की तैयारियों के तहत पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। रिक्त पदों पर नियुक्तियों को लगभग पूरा किया जा चुका है। बूथ से लेकर विधानसभा हलका स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

चुनाव प्रचार की मुख्य कमान मुख्यमंत्री भगवंत मान के हाथों में रहने की संभावना है, जबकि चुनावी प्रबंधन में दिल्ली की टीम की भी अहम भूमिका हो सकती है। पंजाब में दिल्ली के कई आप नेताओं को सक्रिय करने की तैयारी है। उनकी जिम्मेदारियां तय करने का काम चल रहा है और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया भी तैयारियों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

पांच साल का रिपोर्ट कार्ड बनेगा चुनावी हथियार

आप आगामी चुनाव में भगवंत मान सरकार के पांच साल के कार्यकाल को ही अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी लोगों के बीच सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को रखने के साथ विरोधी दलों पर भी निशाना साधेगी।

इसके लिए सरकार का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की योजना है। पार्टी इसे मतदाताओं तक पहुंचाकर अपने कार्यकाल का हिसाब देने की कोशिश करेगी। माना जा रहा है कि चुनावी अभियान में लोकलुभावन योजनाओं और सरकार के कामकाज को प्रमुखता से पेश किया जाएगा।

UP Breaking News Live: यूपी की हर हलचल पर हमारी नजर, राजनीति से अपराध तक पढ़ें सभी बड़ी खबरें

राज्यसभा सांसदों के जाने से बढ़ी चुनौती

2027 के चुनाव से पहले आप के कुछ प्रमुख चेहरों के पार्टी से दूर होने का मुद्दा भी चर्चा में है। राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता जैसे नाम पंजाब की राजनीति और आप की रणनीति से जुड़े रहे हैं।

इनमें कुछ नेताओं की संगठन, युवा, शिक्षा, उद्योग और प्रवासी पंजाबी समुदाय में अपनी पहचान रही है। ऐसे में चुनाव से पहले पार्टी के प्रमुख चेहरों के राजनीतिक समीकरण बदलने को आप के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

2014 में पंजाब की सियासत में हुई थी एंट्री

आम आदमी पार्टी का पंजाब की राजनीति में बड़ा उभार 2014 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। पार्टी ने राज्य की 13 लोकसभा सीटों में से चार पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में आप ने 20 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया।

2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की सीटें घटकर तीन रह गईं, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने जबरदस्त वापसी की। भगवंत मान के नेतृत्व में पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई।

Faridabad Shooting: पिता की मौत; संपत्ति को लेकर विवाद, बड़े भाई ने छोटे पर दागी 3 गोलियां

दिल्ली के बाद पंजाब क्यों है सबसे अहम?

2022 में पंजाब में आप की सरकार बनने के समय दिल्ली में भी पार्टी सत्ता में थी। दिल्ली मॉडल को पंजाब के चुनावी अभियान में प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया था। हालांकि अब दिल्ली की सत्ता हाथ से निकल चुकी है।

ऐसे में पंजाब में दोबारा सरकार बनाना आप के लिए सिर्फ एक राज्य का चुनाव जीतना नहीं, बल्कि पार्टी के राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक ताकत को बनाए रखने की बड़ी परीक्षा भी होगी।

अब नजर इस बात पर है कि भगवंत मान के चेहरे, सरकार के रिपोर्ट कार्ड, संगठन की नई रणनीति और दिल्ली की टीम के चुनावी प्रबंधन के सहारे आम आदमी पार्टी 2027 में अपनी सत्ता बचाने में कितनी सफल होती है।

Location :  Punjab

Published :  29 August 2026, 10:27 AM IST