अदालत की फाइल से गायब 32 लाख के गबन का सबूत, हाईकोर्ट का कड़ा रुख, 3 महीने में तलाशे असली गुनहगार

लुधियाना सिविल कोर्ट के न्यायिक रिकॉर्ड से गुरुद्वारा गबन मामले की जांच रिपोर्ट गायब होने पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सेशन जज को 3 महीने के भीतर जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 July 2026, 1:10 PM IST

Chandigarh: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लुधियाना की एक सिविल अदालत के न्यायिक रिकॉर्ड से एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज (जांच रिपोर्ट की फोटोकॉपी) गायब होने के मामले को अत्यंत गंभीर माना है। हाई कोर्ट ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए इस पूरे प्रकरण की विस्तृत तथ्यात्मक जांच कराने के आदेश जारी किए हैं।

हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि यह पता लगाया जाना बेहद जरूरी है कि आखिरकार कोर्ट के सुरक्षित रिकॉर्ड से वह दस्तावेज कैसे गायब हुआ और इसके पीछे किसकी मिलीभगत या लापरवाही है। कोर्ट ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनकी जवाबदेही तय करने की बात कही है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश को तीन महीने की समयसीमा

इस गंभीर मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस हर्ष बुंगर ने लुधियाना के जिला एवं सत्र न्यायाधीश (District and Sessions Judge) को तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि जांच पूरी होने के बाद इसकी अंतिम रिपोर्ट सीधे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपी जाए।

इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने इस आदेश की एक प्रति लुधियाना जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश (Administrative Judge) को भी भेजने के निर्देश जारी किए हैं ताकि मामले की मॉनिटरिंग ऊपरी स्तर पर भी की जा सके।

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निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट ने रखा बरकरार

न्यायालय ने यह सख्त आदेश उस पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) को खारिज करते हुए दिया, जिसमें निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। दरअसल, निचली अदालत ने वादी (शिकायतकर्ता) को संबंधित गायब दस्तावेज को द्वितीयक साक्ष्य (Secondary Evidence) या फिर उसकी मूल प्रति (Original Copy) प्रस्तुत कर अदालत में साबित करने की अनुमति दे दी थी। हाई कोर्ट ने इस पर मुहर लगाते हुए कहा कि निचली अदालत के इस आदेश में कोई भी कानूनी या प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं है, इसलिए वादी को द्वितीयक साक्ष्य पेश करने की इजाजत बिल्कुल सही है।

अदालती रिकॉर्ड से दस्तावेज का गायब होना गहरी चिंता का विषय

जस्टिस हर्ष बुंगर ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वादी को सबूत पेश करने की अनुमति देना एक अलग कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन न्यायिक रिकॉर्ड में सुरक्षित रखी गई दस्तावेज की फोटोकॉपी का गायब हो जाना एक बिल्कुल अलग और बेहद गंभीर प्रशासनिक विषय है।

अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी और अदालती फाइलों से इस तरह के साक्ष्यों का गायब होना न्याय प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। इसी चूक को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने तथ्यात्मक जांच के जरिए दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

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गुरुद्वारे में 32 लाख रुपये के गबन से जुड़ा है पूरा विवाद

यह पूरा कानूनी विवाद एक गुरुद्वारे द्वारा अपने ही पूर्व पदाधिकारी के खिलाफ दायर किए गए दीवानी वाद (Civil Suit) से जुड़ा हुआ है। गुरुद्वारे ने अपने पूर्व पदाधिकारी से 32 लाख रुपये से अधिक की वसूली के लिए यह मुकदमा दायर किया था।

वाद में दावा किया गया था कि गुरुद्वारे द्वारा गठित एक तीन सदस्यीय विशेष समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर धन के गबन का खुलासा किया था। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर वसूली का मुकदमा चल रहा था, लेकिन सुनवाई के दौरान पता चला कि वह मुख्य समिति रिपोर्ट ही अदालती फाइल से गायब हो चुकी है।

Location :  Chandigarh

Published :  10 July 2026, 12:58 PM IST