दिल्ली दूर नहीं, पर राह में पहरा: जंतर-मंतर की पदयात्रा रोकने पर किसानों का सवाल- ‘शांतिपूर्ण पैदल मार्च से भी डर क्यों?

खनौरी बॉर्डर पर किसानों का दिल्ली मार्च रोक दिया गया है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने पीएम मोदी और हरियाणा सरकार से शांतिपूर्ण पदयात्रा की अनुमति मांगी है। जानिए एमएसपी और व्यापार समझौते को लेकर क्यों सुलग रही है विरोध की आग।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 17 August 2026, 12:34 PM IST

New Delhi: अपनी फसलों के जायज हक और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने निकले देश के अन्नदाता एक बार फिर सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं। पंजाब और हरियाणा के बीच स्थित खनौरी-दाता सिंह वाला बॉर्डर इस वक्त फिर से आंदोलन का मुख्य केंद्र बन चुका है।

संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के आह्वान पर 'किसान बचाओ पदयात्रा' लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे किसानों के रास्ते में हरियाणा पुलिस ने मजबूत बैरिकेड्स खड़े कर दिए हैं।

सड़क बनी बिछौना, बॉर्डर पर जमी रात

रविवार की आधी रात बीत जाने के बाद भी खनौरी बॉर्डर का नजारा बेहद भावुक कर देने वाला था। पुलिस की नाकेबंदी के कारण आगे बढ़ने से रोके गए किसानों ने किसी शिकायत के बिना सड़क के किनारे ही अपना बिस्तर बिछा लिया।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि किसान पूरी तरह से शांत और अनुशासित हैं। उनका इरादा किसी टकराव का नहीं, बल्कि केवल अपनी बात देश की राजधानी तक पहुंचाने का है।

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पीएम मोदी और हरियाणा सरकार से सीधी अपील

किसान नेता डल्लेवाल ने आधी रात को मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हरियाणा सरकार से अपील की। उन्होंने कहा कि किसान कोई बड़ा काफिला या गाड़ियां लेकर नहीं आए हैं, बल्कि वे बेहद सीमित संख्या में शांतिपूर्वक पैदल ही दिल्ली जाना चाहते हैं।

उन्होंने साफ किया कि किसानों का हरियाणा सरकार से कोई निजी झगड़ा नहीं है, इसलिए उन्हें जंतर-मंतर तक जाने का रास्ता दिया जाना चाहिए।

क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?

किसान मुख्य रूप से प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं, उनका मानना है कि इससे देसी खेती और किसानों को बड़ा नुकसान होगा। इसके अलावा, किसान लंबे समय से सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कृषि कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

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कोर्ट से दखल की आस और आगे का रास्ता

किसान प्रतिनिधियों और हरियाणा सरकार के अधिकारियों के बीच अब तक तीन दौर की बातचीत हो चुकी है, जो बेनतीजा रही। ऐसे में किसान नेताओं ने न्यायपालिका की ओर भी उम्मीद भरी नजरों से देखा है।

डल्लेवाल ने कहा कि यदि सरकार उनकी तकलीफ नहीं समझ रही है, तो पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट को खुद इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेकर एक निष्पक्ष रास्ता दिखाना चाहिए। 29 अगस्त को दिल्ली में होने वाली 'किसान पंचायत' को लेकर किसानों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट है।

Location :  New Delhi

Published :  17 August 2026, 12:34 PM IST