सुलतानपुर में किसके नाम खुलेगा 2027 का टिकट? BJP-SP में कई चेहरे, 1009 वोटों का पुराना हिसाब

सुलतानपुर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास करीब सात दशक पुराना है। कांग्रेस, जनसंघ, भाजपा और समाजवादी पार्टी इस सीट पर अलग-अलग दौर में जीत दर्ज कर चुके हैं। 2022 में भाजपा के विनोद सिंह ने सपा के अनूप संडा को सिर्फ 1,009 वोटों से हराया था। 2027 से पहले संभावित दावेदारों के नामों को लेकर चर्चा तेज है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 September 2026, 1:12 PM IST

Sultanpur: सुलतानपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास किसी एक दल के लगातार दबदबे की कहानी नहीं रहा है। आजादी के बाद हुए चुनावों में कभी कांग्रेस ने इस सीट पर अपना प्रभाव बनाया तो कभी भारतीय जनसंघ ने दस्तक दी। इसके बाद जनता पार्टी, भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच भी सत्ता का बदलाव देखने को मिला। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सुलतानपुर की सियासत में संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, अभी किसी प्रमुख दल ने 2027 के लिए अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।

सुलतानपुर विधानसभा सीट मौजूदा समय में 188 नंबर की विधानसभा सीट है। 2022 के चुनाव में भाजपा के विनोद सिंह ने सपा के अनूप संडा को 1,009 वोटों के अंतर से हराया था। विनोद सिंह को 92,715 वोट मिले थे, जबकि अनूप संडा के खाते में 91,706 वोट आए। बसपा के डॉ. देवी सहाय मिश्रा 22,521 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1951 से शुरू होती है चुनावी कहानी

सुलतानपुर विधानसभा का चुनावी इतिहास करीब सात दशक पुराना है। निर्वाचन आयोग के उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के आंकड़े 1951 से दर्ज हैं। उस दौर में विधानसभा क्षेत्रों के नाम और नंबर आज से अलग थे। समय के साथ परिसीमन और विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन के कारण सुलतानपुर सीट का क्रमांक और स्वरूप भी बदलता रहा। शुरुआती चुनावों में कांग्रेस का प्रभाव दिखाई देता है। 1951 और 1957 के चुनाव में कुँवर कृष्ण कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए। 1962 में अब्दुल सामी ने कांग्रेस के लिए जीत दर्ज की।

जनसंघ ने कांग्रेस के सामने खड़ी की चुनौती

1967 का चुनाव सुलतानपुर की सियासत में महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया। भारतीय जनसंघ के राम प्यारे शुक्ल ने कांग्रेस के अब्दुल सामी को हराकर गैर-कांग्रेसी राजनीति को मजबूत जगह दिलाई। इसके बाद 1969 में भी राम प्यारे शुक्ल ने जीत दर्ज की। 1974 में भारतीय जनसंघ के जितेंद्र कुमार विधायक बने। इस तरह लगातार चुनावों में जनसंघ की मौजूदगी ने यह दिखाया कि सुलतानपुर की राजनीति अब सिर्फ कांग्रेस के इर्द-गिर्द सीमित नहीं रह गई थी। 1977 में आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी के जितेंद्र कुमार अग्रवाल विजयी हुए। इसके बाद 1980 में कांग्रेस (आई) ने वापसी की और मोईद अहमद विधायक बने। 1985 और 1989 में भी कांग्रेस के मुईद अहमद ने जीत दर्ज की।

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भाजपा और सपा के बीच बढ़ा मुकाबला

1990 का दशक आते-आते सुलतानपुर की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी की मौजूदगी मजबूत होने लगी। 1991 में भाजपा के राम प्यारे शुक्ल ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1993 में समाजवादी पार्टी के बरकत अली खान ने भाजपा के राम प्यारे शुक्ल को हराकर सपा के लिए इस सीट पर जीत दर्ज की। 1996 में भाजपा के सूर्यभान विजयी हुए। 2002 में भाजपा के ओम प्रकाश पांडेय ने सीट पर कब्जा किया।

इसके बाद 2007 में राजनीतिक तस्वीर फिर बदली। समाजवादी पार्टी के अनूप संडा ने भाजपा के ओम प्रकाश पांडेय को हराया। 2012 में भी अनूप संडा ने जीत दोहराई। इस तरह लगातार दो चुनाव जीतकर वे सुलतानपुर विधानसभा की राजनीति में सपा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

2017 में भाजपा की वापसी

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर सुलतानपुर सीट पर वापसी की। भाजपा के सूर्यभान सिंह ने जीत दर्ज की। निर्वाचन आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्हें 86,786 वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर बसपा के मुजीब अहमद रहे, जबकि सपा के अनूप संडा तीसरे स्थान पर थे। 2022 में भाजपा ने विनोद सिंह को मैदान में उतारा। इस चुनाव में उनका सीधा मुकाबला सपा के अनूप संडा से रहा और मुकाबला बेहद करीबी रहा।

2022 में सिर्फ 1,009 वोट का अंतर

2022 का चुनाव सुलतानपुर विधानसभा के हालिया राजनीतिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में गिना जा सकता है। भाजपा के विनोद सिंह को 92,715 वोट मिले, जबकि सपा के अनूप संडा को 91,706 वोट हासिल हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर सिर्फ 1,009 वोट रहा।

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2027 से पहले इन नामों की चर्चा

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन सुलतानपुर में टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। भाजपा की तरफ से मौजूदा विधायक विनोद कुमार सिंह का नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा में है। इसके अलावा नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण कुमार अग्रवाल और भाजपा नेता रूपेश सिंह के नाम भी संभावित दावेदारों के तौर पर सामने रखे जा रहे हैं।

पुराने आंकड़े बताएंगे सुलतानपुर की बदलती राजनीति

सुलतानपुर विधानसभा का इतिहास देखने पर साफ दिखाई देता है कि यहां समय-समय पर मतदाताओं का राजनीतिक रुझान बदला है। शुरुआती दौर में कांग्रेस का प्रभाव रहा। इसके बाद जनसंघ ने अपनी जगह बनाई। 1977 में जनता पार्टी का दौर आया और फिर कांग्रेस ने वापसी की।

1990 के दशक में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला प्रमुख होता गया। 2007 और 2012 में अनूप संडा की लगातार दो जीत ने सपा को मजबूत स्थिति दी। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा ने लगातार दो चुनाव जीते। अब 2027 के चुनाव से पहले यही सवाल राजनीतिक गलियारों में है कि क्या मौजूदा राजनीतिक समीकरण आगे भी बने रहेंगे या सुलतानपुर एक बार फिर किसी नए बदलाव की गवाह बनेगी।

2027 में टिकट से साफ होगी तस्वीर

फिलहाल सुलतानपुर विधानसभा की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह खुली हुई है। भाजपा के पास वर्तमान विधायक विनोद सिंह हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास 2022 के चुनाव में बेहद कम अंतर से हारने वाले अनूप संडा का पिछला चुनावी रिकॉर्ड है। इसके अलावा दोनों दलों में अन्य संभावित दावेदारों के नाम भी चर्चा में हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में संभावित दावेदारी और आधिकारिक उम्मीदवारी के बीच बड़ा अंतर होता है। इसलिए 2027 के लिए कौन सा दल किस चेहरे पर भरोसा जताता है, यह संबंधित पार्टियों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

Location :  Sultanpur

Published :  17 September 2026, 1:12 PM IST