कादीपुर में किसका होगा कब्जा? दो जीत के बाद BJP के सामने हैट्रिक की चुनौती, टिकट के लिए लंबी कतार

सुलतानपुर की कादीपुर विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। भाजपा पिछले दो चुनाव जीत चुकी है और अब हैट्रिक की तैयारी में है, जबकि सपा, बसपा और कांग्रेस भाजपा के मजबूत किले में सेंध लगाने की कोशिश करेंगी। जानिए कादीपुर का चुनावी इतिहास, मौजूदा राजनीतिक समीकरण और 2027 में टिकट के संभावित दावेदारों के नाम।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 15 September 2026, 1:51 PM IST

Sultanpur: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल धीरे-धीरे तेज होने लगी है। सुलतानपुर की कादीपुर विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर चुकी भाजपा के सामने जहां अपनी जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती होगी, वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस भाजपा के इस मजबूत किले में सेंध लगाने की कोशिश करेंगी।

1951 से शुरू हुआ चुनावी सफर

कादीपुर विधानसभा सीट पर 1951 में पहला चुनाव हुआ था। उस समय यह सीट सामान्य वर्ग के लिए थी और कांग्रेस के शंकर तथा काशी प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1957 में सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। 1957 में कांग्रेस के काशी प्रसाद और शंकर ने फिर जीत हासिल की। इसके बाद लंबे समय तक कांग्रेस का प्रभाव इस सीट पर दिखाई दिया। 1962 में कांग्रेस के श्रीपति मिश्रा, 1967 में सुखदेव और 1969 में जगदीश प्रसाद विजयी रहे।

1974 में जयराज गौतम ने कांग्रेस का परचम लहराया, लेकिन 1977 में जनता पार्टी के बृजलाल ने कांग्रेस के लंबे वर्चस्व को तोड़ दिया। इसके बाद 1980 और 1985 में कांग्रेस ने फिर वापसी की। 1989 में जयराज गौतम ने कांग्रेस को जीत दिलाई। इसके बाद कादीपुर की राजनीति में एक नया दौर शुरू हुआ।

भाजपा और बसपा के बीच भी बदला समीकरण

1991 के चुनाव में भाजपा के रामचंद्र ने जीत हासिल की। इसके बाद 1993 में बसपा के भगेलू राम विजयी रहे। 1996 में भाजपा के काशीनाथ ने सीट पर कब्जा किया। 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में भगेलू राम ने बसपा के टिकट पर लगातार दो जीत दर्ज कीं। इससे कादीपुर में बसपा का मजबूत आधार दिखाई दिया। 2012 में समाजवादी पार्टी के रामचंद्र चौधरी ने 97,283 वोट हासिल कर भगेलू राम को 38,110 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इसके बाद 2017 में चुनावी तस्वीर फिर बदल गई।

2017 में भाजपा की वापसी

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राजेश गौतम को मैदान में उतारा। उन्होंने बसपा के भगेलू राम को 26,604 वोटों के अंतर से हराकर भाजपा को कादीपुर में मजबूत वापसी दिलाई। इसके बाद 2022 में भी भाजपा ने राजेश गौतम पर भरोसा जताया। राजेश गौतम को 96,405 वोट मिले, जबकि सपा के भगेलू राम को 70,682 वोट हासिल हुए।

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इस तरह भाजपा ने 25,723 वोटों के अंतर से लगातार दूसरी जीत दर्ज की। बसपा के हीरालाल 46,388 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के निकलेश सरोज को 3,248 वोट मिले। यानी 2017 और 2022 दोनों चुनावों में राजेश गौतम ने करीब 26 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यही वजह है कि 2027 के चुनाव में कादीपुर को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण और मजबूत सीट माना जा रहा है।

राजेश गौतम के सामने हैट्रिक की चुनौती

2027 में सबसे बड़ा सवाल मौजूदा विधायक राजेश गौतम को लेकर है। लगातार दो चुनाव जीतने के बाद क्या भाजपा एक बार फिर उन्हीं पर भरोसा करेगी? राजेश गौतम के सामने अपने प्रदर्शन को दोहराते हुए लगातार तीसरी जीत दर्ज करने की चुनौती होगी। वहीं पार्टी के भीतर टिकट को लेकर दूसरे दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ती नजर आ रही है। भाजपा से राजेश गौतम के अलावा सुभाष चंद्र और धर्मेंद्र 'बबलू' के नाम भी दावेदारी में बताए जा रहे हैं। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को ही करना होगा।

सपा में भी टिकट को लेकर कई नाम

समाजवादी पार्टी की ओर से पूर्व विधायक भगेलू राम का नाम प्रमुखता से सामने है। उनके अलावा डॉ. अंगद चौधरी, रमेश सोनकर और राजकरन गौतम भी टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं। भगेलू राम का कादीपुर की राजनीति में लंबा अनुभव है। वह बसपा के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके हैं और 2022 में सपा के प्रत्याशी के तौर पर राजेश गौतम को चुनौती भी दे चुके हैं। ऐसे में अगर सपा एक बार फिर उन्हें मैदान में उतारती है तो भाजपा और भगेलू राम के बीच मुकाबला एक बार फिर दिलचस्प हो सकता है।

बसपा भी बना रही जमीन

बहुजन समाज पार्टी भी कादीपुर में अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में है। पार्टी की ओर से रविंद्र कुमार गौतम का नाम 2027 की संभावित दावेदारी में प्रमुखता से सामने आ रहा है। बसपा की ओर से कादीपुर में कैडर कैंप और संगठनात्मक गतिविधियां भी किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में चुनाव नजदीक आने के साथ बसपा का संगठन कितना सक्रिय होता है, यह भी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।

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कांग्रेस के सामने भी वापसी की चुनौती

कभी कादीपुर की राजनीति में मजबूत स्थिति रखने वाली कांग्रेस फिलहाल पिछले चुनाव के प्रदर्शन को सुधारने की कोशिश करेगी। कांग्रेस में विजयपाल और निकलेश सरोज को टिकट के प्रमुख दावेदारों में बताया जा रहा है। निकलेश सरोज 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार थे। हालांकि, उन्हें महज 3,248 वोट मिले थे।

दलित-पिछड़े वोटों पर रहेगी नजर

कादीपुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है। ऐसे में यहां सामाजिक और जातीय समीकरण चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भाजपा जहां अपने संगठन और पिछले दो चुनावों के प्रदर्शन के सहारे मैदान में उतरने की तैयारी करेगी, वहीं सपा और बसपा अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश करेंगी। कांग्रेस भी अपने पुराने प्रभाव को वापस पाने की कोशिश में होगी।

क्या भाजपा लगाएगी जीत की हैट्रिक?

कादीपुर का इतिहास बताता है कि यह सीट लंबे समय तक किसी एक दल की स्थायी जागीर नहीं रही। कांग्रेस के लंबे दौर के बाद यहां भाजपा, बसपा और सपा ने भी अपनी ताकत दिखाई है। अब 2027 में भाजपा के सामने लगातार तीसरी जीत दर्ज करने की चुनौती है। राजेश गौतम अगर फिर मैदान में उतरते हैं तो उनके सामने अपनी पिछली दोनों जीत का रिकॉर्ड दोहराने का दबाव होगा। दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार और रणनीति के जरिए मुकाबला रोचक बनाने की कोशिश करेंगे।

 

(रिपोर्ट: दर्शन कुमार साहू)

Location :  Sultanpur

Published :  15 September 2026, 1:46 PM IST