कासगंज में बिना सेनापति के सपा, MLC चुनाव भी बीता, अब भी खाली है जिलाध्यक्ष की कुर्सी

एमएलसी चुनाव बीत जाने के बाद भी कासगंज में समाजवादी पार्टी को अब तक नया जिलाध्यक्ष नहीं मिल सका है। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जिलाध्यक्ष की कुर्सी खाली रहने से संगठन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 25 October 2026, 11:57 AM IST

Kasganj: एमएलसी चुनाव निकल गया, लेकिन समाजवादी पार्टी को कासगंज में अब तक नया जिलाध्यक्ष नहीं मिल सका। अब विधानसभा चुनाव की बारी है, मगर जिले में संगठन की कमान किसके हाथ में होगी, इस पर फैसला अटका हुआ है। जिलाध्यक्ष की कुर्सी खाली है और दावेदारों के बीच खींचतान के बीच नई जिला कमेटी के गठन का इंतजार जारी है। ऐसे में भाजपा से विधानसभा चुनाव में मुकाबले की तैयारी से पहले सपा के सामने अपना संगठन दुरुस्त करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा को शिकस्त देने के बाद सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह जरूर है, लेकिन जिले में संगठनात्मक तस्वीर अब तक साफ नहीं हो सकी है। जिस समय पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर तक अपनी ताकत बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटना चाहिए, उस समय जिलाध्यक्ष की नियुक्ति ही बड़ा सवाल बनी हुई है। एमएलसी चुनाव भी बिना जिलाध्यक्ष की तैनाती के गुजर गया। अब विधानसभा चुनाव से पहले नई टीम कब बनेगी, इस पर निगाहें टिकी हैं।

लखनऊ की बैठक में तकरार, कासगंज की कमेटी पर गिरी थी गाज

सपा के संगठनात्मक संकट की शुरुआत 19 सितंबर को लखनऊ में हुई बैठक के बाद हुई। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एटा और कासगंज के नेताओं को संभावित विधानसभा प्रत्याशियों के संबंध में फीडबैक लेने के लिए बुलाया था। एटा की चार और कासगंज की तीन विधानसभा सीटों पर चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा होनी थी, लेकिन बैठक के दौरान एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव और विधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रमेश यादव के भतीजे मंजीत यादव के बीच विवाद हो गया था।

यह भी पढ़ें - ग्रेटर नोएडा में समाजवादी पार्टी के नेताओं ने फूंका CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला, पुलिस से हुई नोकझोंक

कहासुनी से शुरू हुआ मामला गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया। पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए करीब एक घंटे बाद ही एटा और कासगंज की जिला कमेटियां भंग कर दीं। इसके बाद से कासगंज में नई कमेटी का गठन नहीं हो सका है।

एमएलसी के बाद अब विधानसभा की परीक्षा

जिलाध्यक्ष की नियुक्ति में देरी के बीच एमएलसी चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई। अब विधानसभा चुनाव की तैयारी सामने है। ऐसे में संगठन को सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना और चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना पार्टी के लिए अहम होगा। जिला कमेटी के बिना इन तैयारियों को किस तरह गति मिलेगी, यह सवाल भी उठ रहा है।

यह भी पढ़ें - “कुछ भी कर लो, आएगी तो समाजवादी पार्टी की ही सरकार”, PDA जन पंचायत में गरजे सांसद छोटेलाल खरवार, भाजपा की उड़ाई धज्जियां

अब देखना यह है कि विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज होने से पहले सपा नेतृत्व कासगंज में जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर किसकी ताजपोशी करता है और नई जिला कमेटी का गठन कब होता है। फिलहाल जिले में सपा के लिए चुनावी तैयारी के साथ संगठन को फिर से खड़ा करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Location :  kasganj

Published :  25 October 2026, 11:55 AM IST