बड़ी खबर: लोकसभा स्पीकर ऑफिस और TMC के 20 बागी MPs को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; जानिए पूरा मामला

देश की शीर्ष अदालत ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर के दफ्तर और टीएमसी के बागी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 August 2026, 1:21 PM IST

New Delhi: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी की पार्टी द्वारा सांसदों के बगावत को लेकर दी गई अर्जी पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लोकसभा स्पीकर के ऑफिस और टीएमसी के सभी बागी 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है।

याचिका में लोकसभा स्पीकर से इन सांसदों के खिलाफ दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई है।

CJI सूर्य कांत की अगुवाई में सुनवाई

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने सांसदों को नोटिस जारी किया, लेकिन लोकसभा स्पीकर के कार्यालय और सदन के सेक्रेटरी-जनरल को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में उनकी ओर से प्रतिनिधित्व किया।

अभिषेक बनर्जी ने अदालत में क्या कहा?

अभिषेक बनर्जी की याचिका का मुख्य मुद्दा इन 20 सांसदों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की प्रक्रिया में कथित देरी है। TMC नेता चाहते हैं कि लोकसभा स्पीकर संविधान में मौजूद दलबदल-रोधी प्रावधानों के तहत दाखिल याचिकाओं पर जल्द फैसला लें।

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जानकारी के मुताबिक, बनर्जी ने पहले इन सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। इसके बाद उन्होंने स्पीकर से मामले का जल्द निपटारा करने की अपील की। 27 जुलाई को उन्होंने लिखित रिमाइंडर भी भेजा था। इसके बाद 12 अगस्त को उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की थी।

आखिर 20 सांसदों पर क्यों उठे सवाल?

विवाद की शुरुआत TMC संसदीय दल में हुई बगावत के बाद हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने या उसके साथ विलय का ऐलान किया। इसके बाद इस गुट ने लोकसभा में अलग राजनीतिक पहचान और मान्यता की मांग की।

TMC का तर्क है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा पहुंचे थे। ऐसे में किसी दूसरे राजनीतिक संगठन से जुड़ना पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के बराबर माना जा सकता है। पार्टी इसी आधार पर दलबदल-रोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग कर रही है।

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वहीं, बागी सांसदों का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि यह कदम पार्टी छोड़ने का मामला नहीं, बल्कि एक वैध राजनीतिक विलय है। इसी दावे और TMC की आपत्ति के बीच अब मामला कानूनी लड़ाई में बदल चुका है।

शिवसेना मामले से भी जुड़ रहा मामला

सुप्रीम कोर्ट पहले से ही दलबदल और सांसदों की अयोग्यता से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई कर रहा है। शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र में पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी देने के फैसले को चुनौती दी है।

Location :  New Delhi

Published :  25 August 2026, 12:08 PM IST