पंजाब चुनाव 2027: क्या लौटेगी दिग्गजों की सियासत या बना रहेगा AAP का दबदबा? दांव पर लगा बड़े परिवारों का अस्तित्व

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बिसात बिछने लगी है। 2022 में AAP की आंधी में ऐतिहासिक हार झेलने वाले बादल, चन्नी और जाखड़ जैसे बड़े सियासी घराने क्या अपनी खोई जमीन वापस पा सकेंगे या जनता फिर नए चेहरों पर भरोसा जताएगी? पढ़ें खास रिपोर्ट।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 16 September 2026, 12:12 PM IST

Chandigarh: पंजाब का आगामी विधानसभा चुनाव 2027 सिर्फ राजनीतिक पार्टियों की हार-जीत का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह राज्य के दशकों पुराने राजनीतिक घरानों के अस्तित्व की भी लड़ाई साबित होने वाला है। वर्ष 2022 के चुनाव में पंजाब के मतदाताओं ने ऐसा ऐतिहासिक जनादेश दिया जिसने राज्य के बड़े-बड़े सियासी दिग्गजों को हाशिए पर ला खड़ा किया था।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 117 में से 92 सीटें जीतकर एकतरफा कब्जा किया था, जबकि कांग्रेस 18 और शिरोमणि अकाली दल महज 3 सीटों पर सिमट गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या 2027 में पंजाब का वोटर 2022 वाले बदलाव को दोहराएगा या पुराने घरानों की वापसी होगी।

2022 की आंधी में ढह गए थे दिग्गज: अब साख बचाने की जद्दोजहद

2022 के चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि पंजाब की जनता ने पीढ़ियों से चले आ रहे राजनीतिक प्रभुत्व को नकार दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे कद्दावर नेताओं को हार का सामना करना पड़ा था।

मजीठिया को पहली बार चुनाव लड़ रही जीवनज्योत कौर ने हराया तो चन्नी अपनी दोनों सीटें गंवा बैठे। राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर कुणाल मेहता का कहना है कि 2022 के नतीजों ने साफ कर दिया था कि केवल परिवार के नाम पर वोट नहीं मिलेंगे। 2027 में इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई साख और विश्वसनीयता को दोबारा हासिल करने की होगी।

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अकाली दल और कांग्रेस के सामने अस्तित्व बचाने की बड़ी चुनौती

2027 के नजदीक आते ही सभी दल फिर से अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। सुखबीर सिंह बादल के सामने अकाली दल को उसके पारंपरिक पंथक और ग्रामीण जनाधार से दोबारा जोड़ने की दोहरी चुनौती है। दूसरी ओर, कांग्रेस भी चन्नी जैसे बड़े चेहरों और नए नेतृत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगाई है, लेकिन विधानसभा चुनाव में व्यक्तिगत जनाधार की परीक्षा पास करना अब भी सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।

भाजपा का नया दांव: पुराने तजुर्बे और क्षेत्रीय चेहरों पर दांव

पंजाब में अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी अब स्थापित राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं पर दांव लगा रही है। सुनील जाखड़ के बाद अब केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है, जो बरनाला से पूर्व विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति की गहरी समझ रखते हैं।

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इसके अलावा पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू जैसे बड़े चेहरों के दम पर भाजपा 2027 में अपना नेटवर्क मजबूत करने में जुटी है। कुल मिलाकर, 2027 का चुनाव यह तय करेगा कि पंजाब की जनता बदलाव के रास्ते पर आगे बढ़ेगी या पुरानी सियासी विरासत पर दोबारा भरोसा जताएगी।

Location :  Chandigarh

Published :  16 September 2026, 12:12 PM IST