6 महीने में कैसे बढ़ गए 40 लाख वोट? राज और उद्धव ठाकरे के तीखे सवालों से गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति

मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व किया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 October 2026, 2:53 PM IST

Mumbai: मुंबई में रविवार को लंबे समय बाद ठाकरे बंधु एक बड़े राजनीतिक मुद्दे पर एक साथ सड़क पर नजर आए। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विरोध मार्च का नेतृत्व किया। ‘विराट गर्जना मोर्चा’ मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बीएमसी मुख्यालय की ओर बढ़ा। कांग्रेस और शरद पवार गुट की NCP के नेता और कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हुए।

'वोट चोरी' के आरोप और SIR को रद्द करने की मांग

मार्च में शामिल नेताओं ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) पर सवाल उठाए। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी पर सवाल उठाया और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने SIR को रद्द करने और अब तक प्रक्रिया में किए गए बदलावों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने वोटिंग के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल करने की मांग भी दोहराई।

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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें हटाने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित था। हालांकि, जहां भाग लेने वाले नेताओं और पार्टियों ने ये आरोप लगाए वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

उद्धव ने 'तानाशाही' पर साधा निशाना

मार्च के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और चुनाव प्रणाली पर तीखा हमला किया। 'मेक इन इंडिया' पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसकी आड़ में देश में तानाशाही को बढ़ावा देने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। उनका भाषण चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर विपक्ष की चिंताओं पर केंद्रित था।

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प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा

इस मार्च की एक खास बात यह थी कि आयोजकों ने राजनीतिक पार्टियों के झंडे दिखाने की इजाजत नहीं दी थी। प्रतिभागियों और समर्थकों से केवल राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर चलने को कहा गया था। आयोजकों ने इस कार्यक्रम को चुनाव प्रक्रिया को लेकर आम जनता की व्यापक चिंता के प्रतिबिंब के तौर पर पेश किया। यह प्रदर्शन 'कॉकरोच जनता पार्टी' के 'जेल भरो आंदोलन' के दो दिन बाद मुंबई के शिवाजी पार्क में हुआ; उस विरोध-प्रदर्शन के दौरान भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।

Location :  Mumbai

Published :  4 October 2026, 2:53 PM IST