
महापौर सुषमा खर्कवाल (Img: Google)
Lucknow: लखनऊ में महापौर सुषमा खर्कवाल और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। कोर्ट ने पार्षद ललित तिवारी को शपथ न दिलाए जाने पर महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को फ्रीज कर दिया है। इस आदेश के बाद शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कोर्ट से निर्वाचित घोषित पार्षद ललित तिवारी को शपथ नहीं दिलाई गई। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए महापौर के अधिकार सीज करने का आदेश जारी किया। हालांकि आदेश के बाद भी शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
सूत्रों के अनुसार महापौर सुषमा खर्कवाल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती हैं। हालांकि उन्होंने कहा है कि वह वर्तमान में अस्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ होने के बाद ही वह आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगी।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जब तक ललित तिवारी का शपथ ग्रहण नहीं होता, तब तक महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार निलंबित रहेंगे। इस बीच शपथ दिलाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के पास बताई जा रही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
इस मामले में याचिकाकर्ता ललित किशोर तिवारी ने कहा कि कोर्ट का आदेश स्पष्ट है और इसका पालन होना चाहिए। वहीं नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बताया कि शपथ दिलाने का अधिकार महापौर के पास है और इस पर अंतिम निर्णय भी उन्हीं को लेना है।
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इस प्रकरण से जुड़े फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड के भाजपा पार्षद प्रदीप शुक्ला टिंकू ने बताया कि उनकी अपील पर 22 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
Location : Lucknow
Published : 23 May 2026, 9:44 AM IST
Topics : Allahabad High Court Lalit Tiwari oath controversy Lucknow Mayor Sushma Kharkwal Uttar Pradesh politics