KPSC भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन! IAS ज्ञानेंद्र गंगवार पर मुकदमा चलाने को CM शिवकुमार की मंजूरी

कर्नाटक के KPSC भर्ती घोटाले में बड़ा मोड़ आया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और लाखों रुपये के कथित लेन-देन के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 24 October 2026, 5:18 PM IST

Bengaluru: कर्नाटक में सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए KPSC भर्ती घोटाले से जुड़ा मामला बेहद गंभीर हो गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा से पहले पहुंचाए गए। इस मामले में पैसों के लेन-देन और उम्मीदवारों को कथित तौर पर परीक्षा की तैयारी कराने के तरीके को लेकर भी कई गंभीर आरोप सामने आए हैं।

CM डी.के. शिवकुमार ने क्यों दी मुकदमे की मंजूरी?

बेंगलुरु में शनिवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने साफ कहा कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि KPSC भर्ती घोटाले में IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखना जरूरी है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मंजूरी के बाद जांच एजेंसियों के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

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400 पदों की भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का आरोप

ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं। वह जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में परीक्षा नियंत्रक के पद पर तैनात थे। उन पर आरोप है कि पशु चिकित्सा अधिकारी के 400 पदों के लिए 8 और 9 जनवरी 2026 को हुई प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए गए। CID की जांच के अनुसार, कम से कम 10 उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि इनमें से कुछ उम्मीदवार बाद में टॉप-20 रैंक सूची में शामिल हुए। हालांकि, ये आरोप हैं और इन पर अंतिम फैसला अदालत में होना है।

20 लाख से 80 लाख रुपये तक वसूली का दावा

जांचकर्ताओं के मुताबिक, कथित तौर पर उम्मीदवारों से प्रति प्रश्नपत्र 20 लाख से 80 लाख रुपये तक लिए गए। इस मामले में बसवराज कन्नाले नाम के एक बिचौलिए की भूमिका भी जांच के घेरे में है। उसे 30 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।

आरोप है कि कन्नाले ने बीदर की एक सहकारी संस्था के जरिए रकम जुटाई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पैसे से 54 लाख रुपये के सोने के गहने खरीदे गए और गंगवार के लिए 11 लाख रुपये के हवाई टिकट बुक किए गए। इन लेन-देन और अन्य व्यवस्थाओं की जांच जारी है।

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रिसॉर्ट में उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र देने का आरोप

CID का आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में एक रिसॉर्ट में ले जाया गया था। वहां उन्हें कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र दिए गए और उत्तर याद करवाए गए। परीक्षा के दिन उन्हें गाड़ियों से केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी किए जाने का दावा है।

इस मामले में गंगवार और कन्नाले के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है।

KPSC के भविष्य पर भी सवाल

इससे पहले बेंगलुरु की एक अदालत ने गंगवार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने शुरुआती सबूतों में पैसों के लेन-देन के संकेत और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका का जिक्र किया था। सरकार KPSC में कथित अनियमितताओं के बाद आयोग के भविष्य को लेकर कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है।

Location :  Bengaluru

Published :  24 October 2026, 5:18 PM IST