धर्म और शास्त्र में कुछ पेड़-पौधों को विशेष महत्व दिया गया है। तुलसी, पीपल, बेल, आंवला और केले की पूजा से दुख, दरिद्रता और रोग दूर होते हैं। इनकी नियमित पूजा से घर में धन, सुख और मानसिक शांति आती है।

तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जहां नियमित तुलसी पूजा होती है वहां दरिद्रता टिकती नहीं। तुलसी घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है। तुलसी की परिक्रमा करने से आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। इसे पूजा और ध्यान का केन्द्र बनाने से सुख-समृद्धि आती है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
पीपल वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। भगवद गीता के 10वें अध्याय के 26वें श्लोक में कृष्ण कहते हैं, ‘वृक्षों में मैं पीपल हूं’। पीपल की पूजा शनि और पितृ दोष दूर करती है। दुख, रोग और मानसिक तनाव कम होता है। इसके साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
बेल का वृक्ष भगवान शिव का प्रिय है। स्कंद पुराण के अनुसार, शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से संचित पाप और आर्थिक संकट दूर होते हैं। बेल की तीन पत्तियां त्रिदेव का प्रतीक हैं। बेल की पूजा करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है। घर में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति बनी रहती है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
आंवला वृक्ष की पूजा को धर्म ग्रंथों में बहुत महत्व दिया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, आंवले की पूजा को हजार गौदान के बराबर माना गया है। आंवले के नीचे दीप जलाने से भाग्य जागृत होता है। यह वृक्ष स्वास्थ्य, समृद्धि और मानसिक संतुलन के लिए लाभकारी माना गया है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
केले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है और इसे गुरु का प्रतिनिधि भी कहा गया है। विवाह, यज्ञ और अन्य शुभ कार्यों में केले के पत्ते और तने का प्रयोग होता है। केले की पूजा और सेवा करने से गरीबी, कलह और आर्थिक संकट दूर रहते हैं। घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)