Bajrang Baan Niyam: रोज क्यों नहीं करना चाहिए बजरंग बाण का पाठ? जानें इसके नियम और फायदे
बजरंग बाण का पाठ संकटों से मुक्ति दिलाता है, लेकिन इसे रोज पढ़ने की मनाही है। जानें बजरंग बाण पढ़ने का सही समय, नियम, राम जी की सौगंध का रहस्य और इससे मिलने वाले चमत्कारी फायदे।
बजरंग बाण की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। सनातन धर्म में संकट की घड़ी में हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। इस पाठ में हनुमान जी को उनके आराध्य प्रभु श्री राम की शपथ दी जाती है, ताकि वे भक्त के बिगड़े और रुके हुए कार्यों को शीघ्र पूर्ण करें। (Img- Pinterest)
2 / 6
इस पाठ में भगवान राम की सौगंध होने के कारण कई विद्वान इसे प्रतिदिन न पढ़ने की सलाह देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब जीवन में अत्यंत आवश्यकता पड़े या प्राणों पर कोई बड़ा संकट आए, तभी बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। विशेषकर मंगलवार और शनिवार के दिन इसका पाठ करना सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। (Img- Pinterest)
3 / 6
बजरंग बाण का पाठ करने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय या संध्याकाल का होता है। पाठ शुरू करने से पहले हाथ में जल और लाल फूल लेकर संकल्प अवश्य लेना चाहिए। संकल्प में अपने उद्देश्य और दिनों की संख्या का उल्लेख करें। इसके बाद प्रभु राम और माता सीता का स्मरण कर कुशा के आसन पर बैठकर पाठ शुरू करें। (Img- Pinterest)
4 / 6
इस साधना के दौरान नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। पाठ शुरू करने से एक दिन पहले से ही लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का त्याग कर सात्विक भोजन ग्रहण करें। जितने दिन का संकल्प हो, उतने दिन ब्रह्मचर्य का कठोरता से पालन करें। हनुमान जी के सामने गाय के घी या तेल का दीपक जलाकर साफ उच्चारण में पाठ करें। (Img- Pinterest)
5 / 6
नियमित और सही विधि से बजरंग बाण का पाठ करने से जीवन के सभी भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह पाठ तंत्र-मंत्र के बुरे प्रभावों को मिटाने और कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक है। इसके प्रभाव से जातक के साहस, शक्ति और पराक्रम में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। (Img- Pinterest)
6 / 6
शत्रुओं पर विजय पाने और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए यह पाठ अचूक माना जाता है। कुंडली में मौजूद मंगल, शनि, राहु या केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने में भी यह कारगर है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से पीड़ित लोगों को इसके पाठ से तुरंत राहत मिलती है और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है। (Img- Pinterest)
बजरंग बाण की रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। सनातन धर्म में संकट की घड़ी में हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए बजरंग बाण का पाठ किया जाता है। इस पाठ में हनुमान जी को उनके आराध्य प्रभु श्री राम की शपथ दी जाती है, ताकि वे भक्त के बिगड़े और रुके हुए कार्यों को शीघ्र पूर्ण करें। (Img- Pinterest)
इस पाठ में भगवान राम की सौगंध होने के कारण कई विद्वान इसे प्रतिदिन न पढ़ने की सलाह देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब जीवन में अत्यंत आवश्यकता पड़े या प्राणों पर कोई बड़ा संकट आए, तभी बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। विशेषकर मंगलवार और शनिवार के दिन इसका पाठ करना सबसे अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। (Img- Pinterest)
बजरंग बाण का पाठ करने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय या संध्याकाल का होता है। पाठ शुरू करने से पहले हाथ में जल और लाल फूल लेकर संकल्प अवश्य लेना चाहिए। संकल्प में अपने उद्देश्य और दिनों की संख्या का उल्लेख करें। इसके बाद प्रभु राम और माता सीता का स्मरण कर कुशा के आसन पर बैठकर पाठ शुरू करें। (Img- Pinterest)
इस साधना के दौरान नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। पाठ शुरू करने से एक दिन पहले से ही लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का त्याग कर सात्विक भोजन ग्रहण करें। जितने दिन का संकल्प हो, उतने दिन ब्रह्मचर्य का कठोरता से पालन करें। हनुमान जी के सामने गाय के घी या तेल का दीपक जलाकर साफ उच्चारण में पाठ करें। (Img- Pinterest)
नियमित और सही विधि से बजरंग बाण का पाठ करने से जीवन के सभी भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह पाठ तंत्र-मंत्र के बुरे प्रभावों को मिटाने और कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक है। इसके प्रभाव से जातक के साहस, शक्ति और पराक्रम में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है। (Img- Pinterest)
शत्रुओं पर विजय पाने और असाध्य रोगों से मुक्ति के लिए यह पाठ अचूक माना जाता है। कुंडली में मौजूद मंगल, शनि, राहु या केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने में भी यह कारगर है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से पीड़ित लोगों को इसके पाठ से तुरंत राहत मिलती है और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है। (Img- Pinterest)