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प्रयागराज में राकेश टिकैत की हुंकार ने सरकार को चुनौती दे दी है। किसान नेता ने जमीन अधिग्रहण, स्कूल बंदी और निजीकरण जैसे मुद्दों पर आंदोलन की चेतावनी दी। क्या ये महापंचायत सिर्फ आवाज़ थी या 2027 के चुनावों की आहट? सरकार के सामने अब दो रास्ते हैं—समाधान या संघर्ष।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (सोर्स इंटरनेट)
Prayagraj (Uttar Pradesh): प्रयागराज की धरती बुधवार को किसानों की आवाज़ से गूंज उठी जब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने "अन्नदाता हुंकार महापंचायत" में सरकार के खिलाफ सख्त तेवर दिखाए। सैकड़ों किसानों की मौजूदगी में टिकैत ने साफ कहा कि अगर सरकार ने किसानों की समस्याओं पर गौर नहीं किया, तो बड़ा आंदोलन होगा और इसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
फसल का वाजिब मूल्य
भूमि अधिग्रहण में मार्केट दर पर मुआवजा
खाद व बीज की समय पर उपलब्धता
बिजली का निजीकरण बंद
बेसिक स्कूलों का मर्जर रोका जाए
राकेश टिकैत का आरोप है कि सरकार एक तरफ तो शिक्षा का अधिकार छीन रही है, दूसरी ओर गांव-गांव शराब के ठेके खोल रही है। उन्होंने सवाल उठाया—“क्या स्कूल बंद कर सरकार मजदूर तैयार करना चाहती है?” टिकैत ने शिक्षा व्यवस्था पर हो रहे प्रहार की तुलना सामाजिक अन्याय से की और कहा कि किसान इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आगरा के किसानों को निजी बिजली कंपनियों ने बेहाल कर दिया है और यदि यह मॉडल इतना सफल है, तो किसान क्यों परेशान हैं?
टिकैत ने सरकार पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों की ज़मीनें छीनी जा रही हैं और 2013 के कानून का भी सही से पालन नहीं हो रहा। विधायक और मंत्री खुद को ऊंची सैलरी दिला रहे हैं, लेकिन किसानों के हिस्से में ठगी आ रही है।
राकेश टिकैत ने साफ कर दिया कि ये आंदोलन सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो “पीएम किसान यात्रा” जैसे राष्ट्रव्यापी आंदोलनों की तर्ज पर बड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि “2027 में जनता जवाब देगी।”
संसद में चल रही ऑपरेशन सिंदूर बहस पर टिकैत ने कहा कि यह भाजपा का एजेंडा है—लोगों का ध्यान असल मुद्दों से हटाने के लिए मुसलमान और पाकिस्तान जैसे विषयों को उछालना। उन्होंने कहा, "देश की सीमाओं की रक्षा सेना पर छोड़ दें, राजनीति किसानों की समस्याओं पर होनी चाहिए।"
टिकैत ने साजिद रशीदी की विवादित टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने रशीदी को “25 लाख का पैकेज लेने वाला तनखइया मौलाना” कहा और तंज कसते हुए कहा—"उसका इलाज हो गया है, दवाई थोड़ी कड़वी थी लेकिन अब आराम मिलेगा।"
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