ईरान-इजरायल युद्ध का असर पड़ोसी देशों पर भी साफ दिख रहा है। एलपीजी की किल्लत से कई उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है।

ईरान वॉर से भारत के पड़ोस में मचा हाहाकार (Img: Google)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से पैदा हुए ऊर्जा संकट ने दुनियाभर में हड़कंप मचा दिया है। इसके चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। जिसका सीधा असर भारत के पड़ोसी देशों पर भी पर भी साफ दिख रहा है।
जानकारी के अनुसार बांग्लादेश में जेट ईंधन की कीमतों में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है। इसके साथ ही, सरकार ने औद्योगिक ईंधन (डीजल) और पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है।
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इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में देश में रोजगार के अवसरों में करीब 4.7% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कॉमर्स, टेक्नोलॉजी स्टार्टअप, हेल्थ सर्विसेज, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वृद्धि के चलते रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच रोजगार की मांग डिजिटल और पारंपरिक दोनों क्षेत्रों में बढ़ेगी। E-Commerce और टेक स्टार्टअप सेक्टर में नेट एम्प्लॉयमेंट चेंज (एनईसी) 8.9% रहने का अनुमान है। इसके बाद स्वास्थ्य सेवा और दवा क्षेत्र 7% और विनिर्माण, इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर 6.6% के साथ आगे रहेंगे। कुल मिलाकर इस अवधि में एनईसी 4.7% रहने का अनुमान है।
यह रिपोर्ट 23 उद्योगों और 20 शहरों में 1,268 नियोक्ताओं से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है, जिसका सर्वेक्षण नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किया गया था।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव के चलते इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर असर पड़ा है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी बाधा से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
ईरान से जुड़े इस संघर्ष को अब करीब चार हफ्ते हो चुके हैं। ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक स्थिति के और अधिक बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।