
पवित्र तुलसी फोटो सोर्स- डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: भारत के लगभग हर घर के आंगन में दिखने वाला तुलसी का पौधा सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी भी है। आमतौर पर इसे भारतीय परंपराओं से जोड़ा जाता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि मुस्लिम बहुल देश में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश की, जो आज दुनिया में होली बेसिल यानी तुलसी के सबसे बड़े आयातकों में से एक बन चुका है।
बड़े पैमाने पर तुलसी का आयात
आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर तुलसी का आयात करता है और कई रिपोर्टों में इसे वैश्विक स्तर पर शीर्ष आयातकों में शामिल बताया गया है। वहां की दवा और वेलनेस इंडस्ट्री में तुलसी की पत्तियों और उसके अर्क की भारी मांग है। खासकर हर्बल टी, कफ सिरप, सप्लीमेंट्स और अन्य स्वास्थ्य उत्पादों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।बांग्लादेशी समाज में पारंपरिक हर्बल उपचार का चलन आज भी मजबूत है।
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तुलसी पर आधारित घरेलू नुस्खों पर भरोसा
सर्दी-खांसी, सांस संबंधी समस्याओं और तनाव से राहत के लिए लोग तुलसी पर आधारित घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं। तुलसी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स, इम्युनिटी बूस्टिंग और स्ट्रेस रिलीफ गुणों को आधुनिक शोधों में भी उपयोगी माना गया है, जिसके चलते इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
भारत से बड़ी मात्रा में खरीद
तुलसी उत्पादन और आपूर्ति में भारत दुनिया का प्रमुख केंद्र है। यहां से सूखी पत्तियां, पाउडर, हर्बल टी बैग्स और लिक्विड एक्सट्रैक्ट्स जैसे कई रूपों में तुलसी का निर्यात किया जाता है। बांग्लादेश भौगोलिक निकटता और व्यापारिक सरलता के कारण भारत से बड़ी मात्रा में इसकी खरीद करता है, जिससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलता है।
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प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही
सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई अन्य देश भी भारत से तुलसी का आयात करते हैं। इन बाजारों में हर्बल और हलाल सर्टिफाइड हेल्थ प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे तुलसी आधारित उद्योगों का वैश्विक विस्तार तेज़ी से हो रहा है।
Location : New Delhi
Published : 27 May 2026, 7:04 PM IST