बंगाल चुनाव 2026: पहले चरण में भारी मतदान, 152 सीटों पर करीब 90% वोटिंग के साथ बना नया रिकॉर्ड

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों पर रिकॉर्ड 89.93% मतदान दर्ज। बीरभूम और कूचबिहार में भारी वोटिंग के बीच कुछ जगहों पर हिंसा की खबरें। पढ़ें पूरी खबर।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 April 2026, 7:46 PM IST

Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के लिए गुरुवार को ऐतिहासिक मतदान संपन्न हुआ। राज्य की 152 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से ही मतदाताओं का उत्साह चरम पर देखा गया, जिसके परिणामस्वरूप शाम तक कुल 89.93% मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह भागीदारी राज्य के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। इस बार मतदाता सूची के विशेष शुद्धिकरण (SIR) के बाद कुल 3.44 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 3.11 करोड़ लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र के प्रति अपनी गहरी निष्ठा व्यक्त की है।

क्षेत्रवार मतदान और रिकॉर्ड प्रदर्शन

मतदान के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो उत्तर बंगाल और सीमावर्ती जिलों में जबरदस्त सक्रियता देखने को मिली है। बीरभूम जिला 92.8% मतदान के साथ पूरे राज्य में शीर्ष पर रहा, जबकि कूचबिहार और झारग्राम जैसे जिलों में भी मतदान का प्रतिशत 92 के पार पहुँच गया। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं और युवाओं की लंबी कतारें सुबह से ही बूथों पर नजर आने लगी थीं। दोपहर 3 बजे तक राज्य का औसत मतदान 78% के करीब था, जो अंतिम घंटों में बड़ी उछाल के साथ 90% के करीब जा पहुँचा। हालांकि कलिम्पोंग जैसे पहाड़ी इलाकों में तुलनात्मक रूप से कम यानी 78.5% वोटिंग हुई, लेकिन शेष 16 जिलों में भागीदारी का स्तर असाधारण रहा।

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हिंसा और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियां

भारी मतदान के बीच राज्य के कुछ हिस्सों से छिटपुट हिंसा और तनाव की खबरें भी सामने आईं। दक्षिण मिदनापुर और बर्नपुर जैसे इलाकों में चुनावी उम्मीदवारों की गाड़ियों पर पथराव और हमले की घटनाएं दर्ज की गईं, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बीरभूम के बोधपुर में EVM खराब होने की सूचना के बाद गुस्साए लोगों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें कुछ सुरक्षाकर्मी घायल भी हुए। इन बाधाओं के बावजूद, चुनाव आयोग ने भारी सुरक्षा बलों की तैनाती कर मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। राज्य के कई बूथों पर तकनीकी खामियों की शिकायतें भी आईं, जिन्हें प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दूर किया।

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भारी मतदान के सियासी मायने

राजनीतिक विशेषज्ञ इस रिकॉर्ड-तोड़ वोटिंग को राज्य में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की सक्रिय भागीदारी के रूप में देख रहे हैं। सत्तापक्ष तृणमूल कांग्रेस ने इसे सरकार की योजनाओं के प्रति जनता का विश्वास और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में उपजा गुस्सा करार दिया है, जबकि विपक्षी भाजपा इसे राज्य में बड़े सत्ता परिवर्तन का संकेत मान रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब मतदान का प्रतिशत 90% के करीब पहुँचता है, तो यह कड़े मुकाबले और मतदाताओं की सजगता का स्पष्ट संकेत होता है। बंगाल में अब सबकी निगाहें दूसरे चरण के मतदान पर टिकी हैं, जिसके बाद ही राज्य की नई सत्ता का भविष्य स्पष्ट हो सकेगा।

Location :  kolkata

Published :  23 April 2026, 7:46 PM IST