US Visa New Rules: अमेरिका जाने से सहम रहे भारतीय छात्र और बदल रहे हैं अपना प्लान? H-1B फीस बना जंजाल

US H-1B Visa New Rules: अमेरिका के नए वीजा एक्सटेंशन फीस नियम से बढ़ीं भारतीय छात्रों की मुश्किलें। कंपनियों पर 4000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ, जिससे घटेगी नौकरियों की गारंटी। जानें भारतीय छात्रों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 11 August 2026, 12:59 PM IST

New Delhi: अमेरिका जाकर पढ़ाई करने और फिर वहीं नौकरी हासिल करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब राह आसान नहीं रही। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) द्वारा लागू किए गए नए वीजा विस्तार शुल्क प्रावधानों ने आईटी सेक्टर और अमेरिकी कंपनियों का गणित बिगाड़ दिया है।

इस नए नियम की वजह से अब भारतीय छात्रों के मन में अनिश्चितता का डर बैठ गया है, जिससे अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट और सोचने-समझने का दौर शुरू हो चुका है।

क्या है नया नियम? कंपनियों की जेब पर कैसे बढ़ेगा बोझ?

साधारण भाषा में समझें तो अमेरिका ने 9/11 रिस्पॉन्स और बायोमेट्रिक एंट्री-एग्जिट फीस के नियमों को सख्त कर दिया है। 9 सितंबर से लागू होने वाले नियम के मुताबिक, अगर कोई कंपनी अमेरिका में अपने पुराने कर्मचारी (चाहे वह उसी पद पर काम क्यों न कर रहा हो) का H-1B वीजा एक्सटेंड (अवधि बढ़ाना) कराती है, तो उसे हर बार 4,000 डॉलर (लगभग 3.35 लाख रुपये) का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसी तरह L-1 वीजा के एक्सटेंशन पर 4,500 डॉलर का खर्च आएगा।

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यह नियम उन बड़ी कंपनियों पर लागू होगा जिनके पास 50 से अधिक कर्मचारी हैं और उनके कुल अमले में 50% से ज्यादा लोग H-1B या L-1 वीजा वाले विदेशी हैं (जिन्हें 50/50 रूल वाली कंपनियां कहा जाता है)। पहले यह फीस सिर्फ पहली बार नौकरी देने या कंपनी बदलने पर लगती थी, लेकिन अब हर बार वीजा रिन्यू कराने पर यह मोटा पैसा देना पड़ेगा।

भारतीय छात्रों की घटती संख्या और डर का असली कारण

इस नियम का सबसे सीधा और बुरा असर उन भारतीय छात्रों पर पड़ रहा है जो लाखों-करोड़ों का एजुकेशन लोन लेकर अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे हैं या जाने की तैयारी कर रहे हैं।

1. जॉब मार्केट में घटेगी मांग: जब कंपनियों को किसी विदेशी छात्र (स्पेशली भारतीय) को लंबे समय तक रखने के लिए बार-बार लाखों रुपये वीजा फीस में भरने पड़ेंगे, तो वे भारतीय छात्रों को हायर (Hire) करने से हिचकिचाएंगी।
2. कंपनी बदलने का रिस्क: पढ़ाई खत्म होने के बाद मिलने वाले OPT (ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) के बाद H-1B वीजा पाना और उसे बनाए रखना अब बहुत महंगा सौदा बन गया है।
3. लोन चुकाने का खौफ: भारी-भरकम लोन लेकर अमेरिका पहुंचे छात्रों को डर है कि अगर वीजा एक्सटेंशन के खर्च से बचने के लिए कंपनियों ने उन्हें निकाल दिया या स्पॉन्सर नहीं किया, तो वे कर्ज कैसे चुकाएंगे।

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अब कहां रुख कर रहे हैं छात्र?

अमेरिकी वीजा नीति में अनिश्चितता और भारी आव्रजन (Immigration) खर्च के कारण अब भारतीय छात्र अमेरिका का मोह छोड़ यूके (UK), जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और वीजा एक्सटेंशन के नियम अमेरिका के मुकाबले ज्यादा पारदर्शी और कम खर्चीले हैं।

Location :  New Delhi

Published :  11 August 2026, 12:59 PM IST