
मोहन भागवत और कपिल सिब्बल (IMG: Dynamite News)
New Delhi: अमेरिका की धरती से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की विविधता और एकता को लेकर ऐसा संदेश दिया, जिस पर अब देश में सियासी बहस शुरू हो गई है। न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सामने भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इस विविधता का सम्मान किया जाना चाहिए। भागवत के इस बयान की अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना यासूब अब्बास ने खुलकर तारीफ की है। वहीं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भागवत पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेश में समझदारी की बातें करने से ज्यादा जरूरी है कि देश में भी वही बात व्यवहार में दिखाई दे।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6 हजार से ज्यादा लोग और अलग-अलग धर्मों के नेता मौजूद थे। भागवत ने अमेरिका और भारत की सामाजिक संरचना की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका की चर्चा में अक्सर ‘बहुलवाद’ शब्द सामने आता है, जबकि भारत की पहचान के साथ ‘विविधता में एकता’ की बात जुड़ी है।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने स्वामी विवेकानंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर राष्ट्र का एक मिशन और एक नियति होती है। भागवत के मुताबिक भारत की नियति विविधता में एकता की अवधारणा को समझना और समय-समय पर दुनिया को इसका एहसास कराना है। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग तरह की विविधताओं के बावजूद लोग एक हैं और यही विविधता उस एकता की खूबसूरती है।
भागवत के बयान पर अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना यासूब अब्बास ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत का बयान सराहनीय है। यासूब अब्बास ने हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर कहा कि जो हिंदू मुसलमानों के प्रति शत्रुता रखता है, वह सच्चा हिंदू नहीं है। उन्होंने दोनों समुदायों को देश की दो आंखें बताते हुए कहा कि चेहरा तभी खूबसूरत दिखाई देता है, जब दोनों आंखें सही सलामत हों। उन्होंने कहा कि भारत में जब भी हिंदुओं के सामने कोई समस्या आई, मुसलमान उनके साथ खड़े रहे और जब मुसलमानों के सामने मुश्किल आई तो हिंदुओं ने भी उनका साथ दिया। इसलिए दोनों समुदायों को एक-दूसरे का दिल से स्वागत करना चाहिए।
दूसरी ओर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भागवत के बयान पर सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सिर्फ बयान देने से बात नहीं बनेगी, बल्कि जमीन पर भी उसी सोच का असर दिखाई देना चाहिए। सिब्बल ने भागवत के न्यूयॉर्क वाले बयान को लेकर तंज कसते हुए इसे ‘विदेश में समझदारी की बातें, देश में चुप्पी’ बताया। उन्होंने कहा कि शब्दों से ज्यादा काम मायने रखता है।
भागवत के बयान पर आई इन दोनों प्रतिक्रियाओं ने राजनीतिक बहस को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ यासूब अब्बास ने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे के संदेश के तौर पर देखा है। दूसरी तरफ कपिल सिब्बल ने भागवत के शब्दों और देश में कथित राजनीतिक व्यवहार के बीच अंतर का सवाल उठाया है। इस मामले में खास बात यह भी है कि यासूब अब्बास ने केवल भागवत की टिप्पणी की तारीफ नहीं की, बल्कि हिंदू-मुस्लिम रिश्तों को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया।
Location : New Delhi
Published : 30 August 2026, 4:49 PM IST
Topics : Kapil Sibal Mohan Bhagwat RSS RSS Chief Yasub Abbas