एनडीए ने बिहार से उपेन्द्र कुशवाहा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। वे पांच मार्च को नमांकन दाखिल करेंगे। बिहार की राजनीति में कुशवाहा एक जाना-माना चेहरा हैं। यही वजह है कि एनडीए ने उनके नाम पर मुहर लगाई है।

उपेन्द्र कुशवाहा
New Delhi: उपेन्द्र कुशवाहा बिहार से राज्यसभा जाएंगे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उम्मीदवारी पर मुहर लगा दी है। वे पांच मार्च कोअपना नामांकन दाखिल करेंगे। कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) ने इसकी पुष्टि की गई है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नितिन भारती ने कहा कि एनडीए के शीर्ष नेतृत्व द्वारा विचार-विमर्श एवं आपसी संवाद के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि उपेंद्र कुशवाहा आगामी 5 मार्च को बिहार विधानसभा में अपना नामांकन करेंगे। इस अवसर पर एनडीए के सभी घटक दलों के नेता उपस्थित रहेंगे।
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इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने आज (मंगलवार) अपने कोटे से दो राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। नितिन नवीन और शिवेश राम राज्यसभा जाएंगे। इसके साथ ही बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने स्पष्ट कर दिया था कि उपेंद्र कुशवाहा भी राज्यसभा जा रहे हैं।
उपेन्द्र कुशवाहा बिहार के एक प्रमुख राजनेता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष हैं। 6 फरवरी 1960 को जन्मे कुशवाहा वैशाली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। वे समता कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक हैं। कुशवाहा एनडीए (NDA) के सहयोग से काराकट लोकसभा सीट से सांसद (2014-2019) और भारत सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रह चुके हैं। वे कुशवाहा/कोइरी समाज के एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। वे बिहार विधानसभा के सदस्य भी रहे हैं।
उपेन्द्र कुशवाहा पहले जनता दल (यूनाइटेड) के सदस्य थे। 2005 में उन्होंने जेडीयू का साथ छोड़कर नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया। उन्होंने कुशवाहा जाति का समर्थन जुटाना शुरू किया। उस वक्त कुशवाहा और कुर्मी समाज जेडी (यू) का मुख्य वोट बैंक था। आधिकारिक तौर पर किसी भी जाति की ठीक-ठीक जनसंख्या बताना तो मुश्किल है, लेकिन बिहार की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि बिहार में कुर्मी 2-3 फीसदी हैं, जबकि कुशवाहा 10-11फीसदी हैं। 31 अक्टूबर 2009 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को जेडी (यू) में लौट आने का न्यौता दिया।
2 फरवरी 2010 को शोषित समाज दल के दिवंगत और समाजवादी नेता बाबू जगदेव प्रसाद की जयंती के मौके पर नीतीश और कुशवाहा ने सार्वजनिक तौर पर पिछड़ी जातियों के समर्थन की घोषणा की। उसी साल नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेज दिया। इसके बाद राजनीतिक रूप से सशक्त कुशवाहा ने जेडी (यू) के भीतर अपनी ताकत दिखाना शुरू किया।
वे एक बार फिर 2013 में तीन मार्च को जदयू से अलग हो गए और रालोसपा नाम की अलग पार्टी बना ली। रालोसपा शुरू में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी पार्टी थी। 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) का गठन किया। इस पार्टी का उद्देश्य कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों को आगे बढ़ाना है। वर्तमान में उनकी पार्टी एनडीए (NDA) के साथ है।