The Candid Talk: DMRC MD डॉ. विकास कुमार बोले- दिल्ली मेट्रो होगी और स्मार्ट, जानिये AI और ड्राइवरलैस Metro की खास बातें

देश के लोकप्रिय ऑनलाइन चैनल पर प्रसारित होने वाले चर्चित पॉडकास्ट The Candid Talk में इस बार के मेहमान हैं दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन के मैनेजिंग डारेक्टर डॉ. विकास कुमार, जिन्होंने दिग्गज पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश को दिये इंटरव्यू में दिल्ली मेट्रो से जुड़ी कई अनसुनी बातों को साझा किया और ड्राइवर मेट्रो के सच को भी पहली बार उजागर किया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 28 June 2026, 12:58 PM IST

New Delhi: देश के चर्चित ऑनलाइन न्यूज़ चैनल डाइनामाइट न्यूज़ के लोकप्रिय पाडकास्ट The Candid Talk में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. विकास कुमार ने पहली बार दिल्ली मेट्रो से जुड़ी कई अनोखी और अनसुनी बातों को साझा किया। दिग्गज पत्रकार और डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश को दिये इंटरव्यू में डॉ. विकास कुमार ने दिल्ली की ड्राइवरलैस मेट्रो के सच को भी उजागर किया। उन्होंने पहली बार खुलासा किया कि आखिर दिल्ली मेट्रो भारत के सबसे बड़े, सबसे आधुनिक और विश्वसनीय मेट्रो नेटवर्क में कैसे बदली। डॉ. विकास कुमार ने मेट्रो की भावी योजनाओं और इसकी तकनीक को लेकर भी कई बातें बताईं।

2004 में क्यों चुनी दिल्ली मेट्रो? विकास कुमार ने बताई असली वजह

एक सवाल के जवाब में उन्होंने DMRC से जुड़ने की पीछे की उनकी कहानी को भी साझा किया। विकास कुमार ने बताया कि वर्ष 2004 में डीएमआरसी से जुड़ने का उनका सबसे बड़ा उद्देश्य 'मेट्रो मैन' डॉ. ई. श्रीधरन के साथ काम करना और उनसे सीखना था। उन्होंने कहा कि उस समय डीएमआरसी देश की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल थी और यहां काम करने का अवसर उनके लिए बेहद खास था।

दिल्ली मेट्रो का भविष्य कैसा होगा?

डीएमआरसी के चैयरमेन ने इस पाडकॉसट में दिल्ली मेट्रो की आगामी 5 साल की योजनाएं, दिल्ली मेट्रो के संचालन में AI का उपयोग, मेट्रो के आय को बढ़ाने की योजना, यात्रियों को और अधिक सुविधा देने की पहल, मेट्रो में करियर के अवसर, भविष्य की दिल्ली मेट्रो आज की मेट्रो में अंतर जैसे कई सवालों के जवाब दिये। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली मेट्रो से जुड़ने का उनका असली उद्देश्य क्या था।

DMRC की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र

डा विकास ने बताया कि विकास कुमार ने बताया कि डीएमआरसी में आने के बाद सबसे पहले जिस बात ने उन्हें प्रभावित किया, वह थी संगठन की कार्यशैली। उन्होंने कहा कि डॉ. ई श्रीधरन अपने अधिकारियों और कर्मचारियों पर पूरा विश्वास करते थे। जिम्मेदारी सौंपने के बाद अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करते थे और सभी को अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता देते थे। यही कार्य संस्कृति डीएमआरसी की सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

DMRC की कमान संभालते ही मिली चुनौती

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब उन्होंने एमडी के रूप में डीएमआरसी की कमान अपने हाथों में ली, उस समय दिल्ली और दुनिया कोविड-19 के प्रकोप से उबर रही थी। ऐसे में दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाले असंख्य लोगों की यात्रा को सुरक्षित बनाना और उनका विश्वास जितना उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन वो इस चुनौती से निपटने से सफल रहे। कई प्रोटोकाल तैयार किये गये। यात्रियों ने भी उसे फॉलो किया। लोगों ने कोविड काल में मेट्रो की पहल को सराहा।

AI और नई तकनीक से बदलेगी दिल्ली मेट्रो की तस्वीर

दिल्ली मेट्रो की तकनीक को लेकर DMRC के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने कहा कि हम हमेशा से नई टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश करती रही है। इसी दिशा में डिजिटाइजेशन, CCTV एनालिटिक्स और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल शुरू किया गया है, जिससे मेट्रो की Efficiency, Reliability और Punctuality में लगातार सुधार हुआ है।

यात्रियों की शिकायतों पर क्या करती है DMRC? 

यात्रियों की शिकायतों से जुड़े सवाल के जवाब में डॉ. विकास कुमार ने बताया कि DMRC हर साल कम से कम दो बार Customer Satisfaction Survey कराती है। इन सर्वे के जरिए यात्रियों की जरूरतों, शिकायतों और gaps को समझा जाता है। इसके बाद उन gaps को भरने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि डेटा जितना ज्यादा डिजिटाइज होगा और उसका जितना बेहतर analysis होगा, यात्रियों को उतनी ही बेहतर सेवा दी जा सकेगी।

ड्राइवरलेस मेट्रो DMRC का सबसे चुनौतीपूर्ण फैसला

DMRC के सबसे कठिन फैसलों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो की शुरुआत एक Autonomous Body के रूप में हुई थी। यहां फैसले तेजी से लिए जाते हैं, क्योंकि समय की बहुत अहमियत है। किसी भी प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना और नई व्यवस्था लागू करना अपने आप में बड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने बताया कि DMRC में स्वचालित (Unmanned Train Operation) यानी बिना ड्राइव की मेट्रो (Driverless Metro) शुरू करना सबसे चुनौतीपूर्ण फैसलों में से एक था। आज दिल्ली मेट्रो 100 किलोमीटर से ज्यादा हिस्से में driverless trains चला रही है।

65 लाख यात्रियों की जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह सवाल था कि Driverless System कितना reliable होगा, लेकिन protocols और systems तैयार करने के बाद इसकी विश्वसनीयता साबित हुई। वर्तमान में DMRC करीब 416 किलोमीटर के नेटवर्क का संचालन कर रही है, जिसमें गुरुग्राम और नोएडा मेट्रो भी शामिल हैं। रोजाना औसतन करीब 65 लाख यात्री मेट्रो से सफर करते हैं, जबकि peak days में यह संख्या 80 लाख तक पहुंच जाती है। इतने बड़े यात्री दबाव को संभालना DMRC के लिए बड़ी जिम्मेदारी है।

24 घंटे भरोसेमंद सेवा 

विकास कुमार ने कहा कि मेट्रो सिस्टम को 24 घंटे बेहतरीन स्थिति में रखना जरूरी होता है। इसके लिए डिजाइन, planning और backup systems पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि reliability और punctuality में थोड़ी सी भी चूक नहीं हो सकती। इसी वजह से कर्मचारियों को लगातार training, skill development और safety practices से जोड़ा जाता है।

(पूरा इंटरव्यू देखने के लिये दिये गये वीडियो लिंक पर क्लिक करें: https://youtu.be/vkLm0OnyYlM)

Location :  New Delhi

Published :  28 June 2026, 12:52 PM IST