
सुप्रीम कोर्ट (Img : Google)
New Delhi : देश की अदालतों में लंबित मामलों और फैसलों में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि हाईकोर्ट किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि रिजर्व किए गए फैसले अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाए जाएं। खासतौर पर जमानत जैसे मामलों में अदालतों को तुरंत फैसला देने पर जोर दिया गया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि बेल यानी जमानत से जुड़े मामलों में आदेश उसी दिन सुनाया जाना चाहिए। अगर किसी कारण से फैसला सुरक्षित रखा जाता है तो उसे अगले दिन तक सुनाकर वेबसाइट पर अपलोड करना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की आजादी से जुड़े मामलों में देरी बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि फैसलों में देरी से वादियों को अपूरणीय क्षति होती है।
सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव की तैयारी: कॉलेजियम ने 5 नामों की सिफारिश, जानिए कौन-कौन शामिल
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर कोर्ट सिर्फ फैसले का ऑपरेटिव हिस्सा सुनाती है तो पूरा विस्तृत आदेश 15 दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।
इसके अलावा अगर पूरा फैसला खुली अदालत में सुनाया जाता है। उसे 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर डालना जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पक्षकारों को फैसले के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई हाईकोर्ट चार महीने तक फैसला नहीं सुनाता है तो संबंधित पक्ष उस हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क कर सकता है। ऐसी स्थिति में मामले को दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जा सकता है।
Location : New Delhi
Published : 29 May 2026, 4:42 PM IST