चुनाव में मुफ्त की रेवड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, CJI बोले- फ्रीबीज पर गौर करने की जरूरत; जानिये पूरा अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को चुनाव में फ्रीबीज को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर यह कब तक चलता रहेगा?

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 19 February 2026, 12:35 PM IST

New Delhi:  सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को चुनाव में फ्रीबीज को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर यह कब तक चलता रहेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि कई राज्य सरकारें भारी बजट घाटे के बावजूद करोड़ों रुपये विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर सब्सिडी देने में खर्च कर रही हैं, जबकि विकास और बुनियादी ढांचे के लिए धन की कमी की शिकायत करती हैं। अदालत ने संकेत दिया कि ऐसी नीतियों पर व्यापक स्तर पर पुनर्विचार की आवश्यकता है, क्योंकि इनका सीधा असर देश की आर्थिक प्रगति पर पड़ सकता है।

आर्थिक विकास में बाधा बन सकती हैं ‘फ्रीबी’ नीतियां

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने कहा कि गरीबों की सहायता करना कल्याणकारी राज्य की जिम्मेदारी है। लेकिन बिना आय या आवश्यकता का अंतर किए सभी को मुफ्त सुविधाएं देना दीर्घकाल में वित्तीय अनुशासन को कमजोर कर सकता है। अदालत ने चेताया कि ऐसी प्रवृत्ति देश के आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

रोजगार सृजन पर जोर देने की जरूरत

पीठ ने स्पष्ट कहा कि राज्यों को मुफ्त भोजन, साइकिल या बिजली बांटने के बजाय रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। अदालत के अनुसार, यदि लगातार मुफ्त सुविधाएं दी जाती रहेंगी तो कार्य संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उत्पादकता घट सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं पर निवेश कम होना और राजस्व का बड़ा हिस्सा वेतन तथा सब्सिडी में खर्च होना चिंता का विषय है।

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तमिलनाडु की बिजली योजना पर नोटिस

सुनवाई के दौरान अदालत ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम सरकार के नेतृत्व वाली बिजली वितरण कंपनी की उस याचिका पर केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया, जिसमें मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने से जुड़े प्रावधान को चुनौती दी गई है। पीठ ने पूछा कि बिजली शुल्क अधिसूचित होने के बाद अचानक ऐसी योजना लागू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, खासकर तब जब अधिकांश राज्य वित्तीय दबाव झेल रहे हैं। यह मामला विशेष रूप से तमिलनाडु की नीतियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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तुष्टीकरण बनाम कल्याणकारी नीति की बहस

अदालत ने यह भी प्रश्न उठाया कि भुगतान करने में सक्षम और असमर्थ लोगों के बीच भेद किए बिना मुफ्त सुविधाएं देना कहीं तुष्टीकरण की नीति तो नहीं बन जाता। न्यायालय के अनुसार, वास्तविक जरूरतमंदों को लक्षित सहायता देना ही संतुलित और टिकाऊ समाधान हो सकता है। इस टिप्पणी के साथ ही ‘मुफ्त की रेवड़ियां’ बनाम आर्थिक अनुशासन की बहस एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गई है।

Location :  New Delhi

Published :  19 February 2026, 12:35 PM IST