जस्टिस भुइयां का तीखा सवाल: क्या पुलिस की गिरफ्त में आते ही नागरिक खो देता है अपने मौलिक अधिकार?

जंतर-मंतर पर नीट छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों की तटस्थता खत्म हो रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 1:02 PM IST

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने जंतर-मंतर पर NEET छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों से जिस निष्पक्षता और तटस्थता की उम्मीद की जाती है, वह धीरे-धीरे खत्म होती दिख रही है।

रिटायर्ड IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद की किताब "पुलिसिंग द रिपब्लिक" के लॉन्च पर बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि युवा IPS अधिकारियों को खुद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग करते देखना बहुत निराशाजनक है।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

जस्टिस भुइयां ने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस राज्य की शक्ति और अधिकार का प्रतीक होती है। जब आम नागरिक असहाय महसूस करते हैं या अन्याय का सामना करते हैं, तो वे मदद के लिए पुलिस के पास जाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि प्रभावी पुलिसिंग के लिए हमेशा बहुत ज्यादा बल प्रयोग की जरूरत नहीं होती। पुलिस के लिए विश्वसनीयता बनाए रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि जनता का भरोसा ही कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति बनाई

NEET छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद कोर्ट ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और उसके बाद संसद की ओर मार्च के दौरान बहुत ज़्यादा बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए एक हाई-लेवल पैनल बनाया।

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इस समिति के प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी हैं। यह पैनल लाठीचार्ज, आंसू गैस, पैलेट गन और इलेक्ट्रॉनिक बैटन के इस्तेमाल के आरोपों के साथ-साथ महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े मुद्दों की भी जांच करेगा। इसके अलावा, घटना से जुड़े CCTV फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग की भी समीक्षा की जाएगी।

अगर सरकारी अधिकारी कानून तोड़ेंगे, तो अराजकता फैलेगी

जस्टिस भुइयां ने कहा कि अगर सरकारी अधिकारी खुद कानून का उल्लंघन करने लगें, तो कानून के प्रति जनता का सम्मान कम हो जाता है और अराजकता फैलती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गिरफ्तारी के बाद किसी नागरिक के मौलिक अधिकार खत्म हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी सभ्य समाज ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकता।

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कस्टडी में टॉर्चर और मौत पर चिंता

सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने कस्टडी में टॉर्चर और मौत को एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार करना कानून के शासन के खिलाफ है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और पुलिस की जवाबदेही सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

Location :  New Delhi

Published :  5 September 2026, 1:02 PM IST