New Delhi: डॉक्टरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मरीजों की शिकायत पर ऐसे ही जवाबदेह रहेंगे चिकित्सक

सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और अस्पतालों को Consumer Protection Act के दायरे से बाहर करने की मांग वाली क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी। पांच जजों की पीठ ने 1995 के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखा। अब चिकित्सा सेवाओं में कमी को लेकर मरीज उपभोक्ता कानून के तहत शिकायत कर सकेंगे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 September 2026, 8:26 AM IST

New Delhi: डॉक्टरों और अस्पतालों की जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि चिकित्सा सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में रहेंगी। पांच जजों की पीठ ने उस क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 1995 के ऐतिहासिक फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की गई थी।

1995 के फैसले को चुनौती देने की कोशिश

मेडिको लीगल सोसायटी ऑफ इंडिया के डॉ. राजीव डी. जोशी की ओर से यह क्यूरेटिव याचिका दायर की गई थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 1995 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत चिकित्सा सेवाओं को Consumer Protection Act के दायरे में माना गया था।

उस फैसले में मरीज को उपभोक्ता माना गया था। साथ ही चिकित्सा सेवा में कमी पाए जाने पर मरीज को डॉक्टर या अस्पताल के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में शिकायत करने का अधिकार दिया गया था।

पांच जजों की पीठ ने क्या कहा?

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पांच सदस्यीय पीठ ने 9 सितंबर को याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने कहा कि क्यूरेटिव याचिका पर विचार करने के लिए निर्धारित नियमों के तहत इस मामले में कोई आधार नहीं बनता। यानी 1995 में तय की गई व्यवस्था को बदलने का रास्ता इस याचिका के जरिए नहीं खुला।

वकीलों के फैसले का दिया गया था हवाला

याचिकाकर्ता ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया फैसले का भी हवाला दिया था, जिसमें कानूनी पेशेवरों यानी वकीलों को सेवा में कमी के मामलों में Consumer Protection Act के दायरे से बाहर रखा गया था।

याचिका में इसी आधार पर चिकित्सा पेशे को लेकर 1995 के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। हालांकि पांच जजों की पीठ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

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डॉक्टरों पर क्यों लागू रहेगा कानून?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वकीलों से संबंधित पिछला फैसला विशेष रूप से कानूनी पेशे से जुड़ा था। वकीलों को उपभोक्ता कानून से बाहर रखने का फैसला अपने आप चिकित्सा पेशे से जुड़े पुराने फैसले को दोबारा खोलने का आधार नहीं बनता।

इस फैसले का सीधा मतलब है कि चिकित्सा सेवाओं में कमी को लेकर मरीजों के लिए उपभोक्ता कानून के तहत उपलब्ध कानूनी रास्ता बरकरार रहेगा।

अब फैसले आम लोगों तक आसान भाषा में

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक जानकारी को आम लोगों तक आसान भाषा में पहुंचाने की पहल भी शुरू की है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर शीर्ष अदालत ने ‘जन सूचना सेवा’ शुरू करने की घोषणा की। इसके तहत महत्वपूर्ण फैसलों और आदेशों का सार सरल हिंदी में उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके अलावा 15 से 30 मिनट के हिंदी ऑडियो-वीडियो बुलेटिन भी जारी किए जाएंगे। आगे चलकर यह सुविधा अन्य भारतीय भाषाओं में भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी।

Location :  New Delhi

Published :  15 September 2026, 8:26 AM IST