सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का अनोखा मामला; CJI के भाई को लगाया फोन, जस्टिस सूर्यकांत बोले- ऐसे तत्वों को छोड़ेंगे नहीं

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई और अवमानना की चेतावनी दी। मामला बौद्ध माइनॉरिटी कोटे से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने धर्म परिवर्तन पर भी सवाल उठाए हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 25 March 2026, 6:14 PM IST

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान उस समय माहौल गर्म हो गया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता और उसके परिवार पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पिता द्वारा कथित तौर पर न्यायाधीश के परिजनों से संपर्क करने को गंभीर मामला बताया है।

CJI ने की ये सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने तीखे शब्दों में कहा कि यह बेहद गंभीर है कि किसी ने उनके आदेश पर सवाल उठाने के लिए उनके भाई को फोन किया। उन्होंने कहा, “क्या याचिकाकर्ता मुझे बताएंगे कि मुझे क्या करना है?” उन्होंने वकील से पूछा कि क्यों न इस मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।

अवमानना की दी चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस तरह का व्यवहार न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अगर याचिकाकर्ता इस तरह का आचरण करता है तो वकील को भी केस से अलग हो जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति देश से बाहर भी चला जाए, तब भी कानून उसे पकड़ सकता है।

ये था मामला

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन एडमिशन से जुड़ा हुआ है। दरअसल हरियाणा के दो युवकों ने बौद्ध माइनॉरिटी कोटे के तहत दाखिले की मांग की थी। उनका दावा था कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया है और उनके पास वैध माइनॉरिटी सर्टिफिकेट भी है।

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जनवरी में हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन अभ्यर्थियों के धर्म परिवर्तन पर संदेह जताया था। कोर्ट का मानना है कि यह परिवर्तन केवल एडमिशन पाने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है। इसी आधार पर उनके माइनॉरिटी सर्टिफिकेट की जांच के आदेश भी दिए गए थे।

वकील ने मांगी माफी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी और उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह मामले में कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे।

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न्यायपालिका की गरिमा पर जोर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने बयान में साफ कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी तरह का दबाव या धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अपने 23 साल के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों से निपटना उन्हें आता है।

 

 

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Published : 
  • 25 March 2026, 6:14 PM IST