कैबिनेट विस्तार के बाद तय होगी रणनीति; सितंबर में विशेष संसद सत्र की तैयारी, परिसीमन और महिला आरक्षण पर फैसला

मोदी सरकार सितंबर मध्य के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इस सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। कैबिनेट विस्तार से पहले एनडीए सहयोगियों को साधने की कोशिश जारी है। डीएमके और एनसीपी की भूमिका इस पूरे राजनीतिक समीकरण में अहम मानी जा रही है। वहीं केंद्र ने विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मध्यस्थता परिषद का गठन किया है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 29 August 2026, 11:25 AM IST

नई दिल्ली: मोदी सरकार सितंबर मध्य के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इस दो दिवसीय विशेष सत्र में परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा और संभावित विधायी कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार की योजना विशेष सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार के जरिए एनडीए में शामिल होने के इच्छुक दलों को साथ लाने की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य एशिया दौरे से लौटने के बाद विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार को लेकर अंतिम दौर की बातचीत शुरू होने की संभावना है। सरकार ने मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी अभी तक सत्रावसान नहीं किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर विशेष सत्र बुलाने का विकल्प खुला रहे।

कैबिनेट विस्तार से पहले एनसीपी और डीएमके पर नजर

सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट विस्तार और विशेष सत्र को लेकर सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। इनमें महाराष्ट्र की एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय और तमिलनाडु की डीएमके को एनडीए में शामिल करने की कोशिश शामिल है।

बताया जा रहा है कि दोनों मामलों में बातचीत अंतिम चरण में है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एनसीपी के दोनों गुटों को साथ लाने को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं।

वहीं, परिसीमन के मुद्दे पर सरकार ने डीएमके को भरोसा दिया है कि राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव करते समय आबादी के आधार पर होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सीटों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रावधान विधेयक के मसौदे में शामिल किया जा सकता है।

परिसीमन बिल के लिए डीएमके की भूमिका अहम

परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार एनसीपी-एसपी के समर्थन को लेकर आश्वस्त बताई जा रही है, लेकिन डीएमके की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

डीएमके के पास लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने में डीएमके का समर्थन निर्णायक हो सकता है।

इसके अलावा डीएमके से केवल परिसीमन ही नहीं, बल्कि एनडीए में शामिल होने और केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व देने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत चल रही है। डीएमके की सहमति के बाद ही विशेष सत्र और कैबिनेट विस्तार की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी।

केंद्र ने बनाया मध्यस्थता परिषद, विवाद समाधान व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

इसी बीच केंद्र सरकार ने देश में मध्यस्थता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मध्यस्थता परिषद (Mediation Council of India) का गठन कर दिया है।

केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह परिषद 2023 के मध्यस्थता अधिनियम के तहत बनाई गई है। परिषद का उद्देश्य संस्थागत विवाद समाधान प्रणाली को नियंत्रित करना और मध्यस्थता सेवाएं देने वाली संस्थाओं को मान्यता देना होगा।

इसके अलावा, मध्यस्थता प्रशिक्षण और प्रमाणन देने वाले संस्थानों की निगरानी की जिम्मेदारी भी परिषद को दी गई है।

संसदीय समिति ने बताया था जरूरी कदम

कानून एवं कार्मिक मंत्रालय से जुड़ी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय मध्यस्थता व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए मध्यस्थता परिषद के गठन को जरूरी बताया था।

समिति के अनुसार, मध्यस्थता अधिनियम को पूरी तरह लागू करने के लिए परिषद का गठन एक महत्वपूर्ण शर्त थी। इससे पहले 9 अक्टूबर 2023 को परिषद के गठन और शुरुआती प्रावधानों से जुड़ी अधिसूचना जारी की गई थी।

Location :  New Delhi

Published :  29 August 2026, 11:25 AM IST