
Image Source (Dynamite News
नई दिल्ली: इस्पात मंत्रालय में इन दिनों एक वरिष्ठ अधिकारी की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) और MOIL लिमिटेड इस मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ के सूत्रों के अनुसार, SAIL और RINL में CMD का पद लंबे समय से खाली है।
सबसे पहले बात MOIL की। आरोप है कि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां CMD पद पर ऐसे अधिकारी की तैनाती कराई, जिन पर लोकपाल में मामला लंबित है।
अब बात SAIL की। वर्ष 2023 में अमरेंदु प्रकाश को कंपनी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल 2028 तक था लेकिन उन्होंने अचानक मार्च में इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का अनैतिक दबाव बताया जा रहा है। यह सवाल उठता है कि आखिर एक महारत्न कंपनी के चेयरमैन को तय कार्यकाल से पहले इस्तीफा क्यों देना पड़ा।
इसके बाद उसी अधिकारी ने MOIL में कार्यरत अपने करीबी अधिकारी को SAIL के CMD का कार्यभार दिलाने के लिए प्रस्ताव भेजा, जिसे DoPT ने खारिज कर दिया।
MOIL में डायरेक्टर (पर्सनल) का पद जून में खाली होने वाला है। इसके लिए Public Enterprises Selection Board (PESB) ने आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन आरोप है कि इस प्रक्रिया को ‘Kept in Abeyance’ कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे उद्देश्य अपने चहेते CMD को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी देना है।
अब बात RINL की। हाल ही में केंद्र सरकार ने कंपनी को 11 हजार करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। CMD पद के लिए PESB ने S. Sakthimani का चयन किया था, लेकिन आरोप है कि इस नियुक्ति को आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके बजाय एक अपेक्षाकृत जूनियर अधिकारी को पहले ED पद पर पदोन्नत किया गया और फिर Search-cum-Selection Committee (SCSC) के माध्यम से CMD पद पर नियुक्त कर दिया गया।
सूत्रों का दावा है कि यह अधिकारी न केवल अपने पसंदीदा अधिकारियों को CMD बना रहे हैं, बल्कि डायरेक्टर स्तर के कई पदों को जानबूझकर खाली रखकर उनकी जिम्मेदारियां भी उन्हीं को सौंप रहे हैं।
MOIL की तरह RINL में भी डायरेक्टर (ऑपरेशंस) का पद ‘Kept in Abeyance’ रखा गया है।
मंत्रालय के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मार्च महीने में SAIL में एक अन्य डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर भी कई शिकायतें थीं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर नियुक्ति को आगे बढ़ाया गया।
अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या वजह थी कि अमरेंदु प्रकाश ने तय कार्यकाल से पहले इस्तीफा दिया? जिन अधिकारियों पर मामले लंबित हैं, उन्हें अहम पदों पर क्यों नियुक्त किया गया? PESB द्वारा प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद महत्वपूर्ण पदों को ‘Kept in Abeyance’ क्यों रखा जा रहा है? और क्या इन फैसलों के पीछे किसी तरह का पक्षपात या दबाव काम कर रहा है?
Location : New Delhi
Published : 7 April 2026, 5:04 PM IST
Topics : bureaucracy news MOIL RINL SAIL Steel Ministry