दिल्ली समेत 6 राज्यों में SIR की समय सीमा बढ़ी, इस तिथि तक नाम जुड़वाने का मौका

चुनाव आयोग ने गुरुवार को महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, तेलंगाना और नगालैंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कार्यक्रम में बदलाव किया है। 29 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में आयोग ने संशोधित समयसीमा की जानकारी दी है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 30 October 2026, 1:17 AM IST

New Delhi: चुनाव आयोग ने छह राज्यों  महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, तेलंगाना और नगालैंड में एसआईआर के कार्यक्रम में बदलाव किया है। आयोग ने 29 अक्तूबर 2026 को आदेश जारी कर संशोधित समयसीमा की जानकारी दी। नए कार्यक्रम में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन और दावे-आपत्तियों के निपटारे की तारीखें तय की गई हैं। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को नई समयसीमा का प्रचार-प्रसार करने का निर्देश भी दिया है।

चुनाव आयोग के ताजा आदेश में छह राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, तेलंगाना और नगालैंड हैं। इन सभी जगहों पर संशोधित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस तिथि को आयेगी अंतिम मतदाता सूची

संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नगालैंड में अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के लिए 30 नवंबर 2026 की तारीख तय की गई है।

दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची कब आएगी

दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख बाकी पांच राज्यों से अलग रखी गई है। यहां अंतिम सूची 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। दिल्ली में दावे और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा भी अलग है। इसके लिए 15 दिसंबर 2026 अंतिम तारीख तय की गई है।

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दावे और आपत्तियों के निपटारे की आखिरी तारीख

चुनाव आयोग ने छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दावे और आपत्तियों के निपटारे के लिए अलग-अलग तारीखें तय की हैं। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में 20 नवंबर 2026 तक दावे-आपत्तियों का निपटारा करना होगा।

महाराष्ट्र और नगालैंड में इसके लिए 25 नवंबर 2026 अंतिम तारीख है। वहीं, तेलंगाना में दावे-आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा 26 नवंबर 2026 है। अगर बात दिल्ली की करें तो यहां यह प्रक्रिया 15 दिसंबर 2026 तक पूरी करनी होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने फार्म-6 की अनिवार्यता पर उठाए सवाल

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सवाल उठाया कि जिन लोगों के नाम 2026 की मतदाता सूची में पहले से दर्ज थे, लेकिन गणना फार्म जमा नहीं होने के कारण प्रारूप सूची से बाहर हो गए, उनसे नए मतदाता की तरह फार्म-6 भरने की अपेक्षा क्यों की जा रही है।

Location :  New Delhi

Published :  30 October 2026, 1:11 AM IST