बच्चों के अपहरण पर SC का बड़ा कदम, केंद्र-राज्यों समेत 4 मंत्रालयों को नोटिस; जानें क्या है मांग

बच्चों के अपहरण के मामलों में समयबद्ध जांच और देशभर में एक समान सख्त तंत्र बनाने की मांग वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गृह, कानून और शिक्षा मंत्रालय समेत विधि आयोग को नोटिस जारी किया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 10 September 2026, 2:40 PM IST

New Delhi: देश में बच्चों के अपहरण के मामलों की जांच और कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बच्चों की किडनैपिंग के मामलों की समयबद्ध जांच और पूरे देश में एक समान व्यवस्था बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है।

10 सितंबर 2026 को भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और विधि आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह जनहित याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है।

बच्चों के अपहरण के लिए समान व्यवस्था की मांग

याचिका में मांग की गई है कि बच्चों के अपहरण से जुड़े मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक Uniform Nationwide Mechanism बनाया जाए। इसके तहत ऐसे मामलों की जांच निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी करने की व्यवस्था हो। याचिका में यह भी मांग की गई है कि बच्चों के अपहरण के मामलों की जांच ACP या SHO रैंक से नीचे के अधिकारी से न कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दिए जाने से ऐसे मामलों में कार्रवाई ज्यादा प्रभावी और समयबद्ध हो सकती है।

एक साल में ट्रायल पूरा करने की मांग

याचिका में बच्चों के अपहरण के मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने की भी मांग की गई है। इसमें सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की तर्ज पर विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इन विशेष अदालतों में बच्चों के अपहरण से जुड़े मामलों का ट्रायल एक साल के भीतर पूरा कर फैसला सुनाया जाए।

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अपहरणकर्ताओं की संपत्ति जब्त करने की मांग

PIL में अपराधियों पर आर्थिक कार्रवाई को लेकर भी कई मांगें रखी गई हैं। याचिकाकर्ता ने अपहरणकर्ताओं और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति का आकलन कर उसे जब्त करने की मांग की है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी संपत्ति विरोधी कानून लागू करने की मांग भी की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई से संगठित अपराध पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।

सजाएं एक के बाद एक लागू करने की मांग

याचिका में अपराधियों में कानून का डर पैदा करने के लिए सजा से जुड़ा एक और सुझाव दिया गया है। इसमें अलग-अलग धाराओं के तहत मिलने वाली सजाओं को एक साथ चलाने यानी Concurrent करने के बजाय एक के बाद एक यानी Consecutive चलाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे गंभीर अपराधों में दोषी पाए जाने वाले लोगों पर सख्त कानूनी प्रभाव पड़ेगा।

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बच्चों की तस्करी और शोषण का भी मुद्दा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के सामने बच्चों से जुड़े संगठित अपराध का मुद्दा भी रखा गया। याचिका में दावा किया गया है कि देश में बच्चों की तस्करी, अवैध रूप से गोद लेने, जबरन मजदूरी और भीख मंगवाने से जुड़े अंतरराज्यीय संगठित गिरोह सक्रिय हैं। याचिका में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई बार बच्चे के लापता होने पर पुलिस FIR दर्ज करने के बजाय केवल 'गुमशुदगी' की रिपोर्ट दर्ज करती है।

अब केंद्र और राज्यों के जवाब पर नजर

इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से बच्चों के अपहरण के मामलों में तत्काल सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों, विधि आयोग, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। अब मामले में आगे की सुनवाई के दौरान सरकारों और संबंधित संस्थाओं की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी।

 

Location :  New Delhi

Published :  10 September 2026, 2:40 PM IST