
जम्मू के नरवाल से बेदखल रोहिंग्या (सोर्स- एक्स)
Jammu: जम्मू के नरवाल इलाके से अवैध बस्तियों और झुग्गियों को हटाए जाने के बाद, वहां रह रहे रोहिंग्या अब देश के अन्य राज्यों में छुपकर बसने की फिराक में हैं। पिछले 18 वर्षों से स्थानीय संस्कृति और भाषा में पूरी तरह घुल-मिल चुके इन लोगों का अब छोटे-छोटे समूहों में अलग-अलग राज्यों में बिखरना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रशासन द्वारा नरवाल में की गई कार्रवाई के बाद रोहिंग्या परिवारों ने अपने अगले कदम को लेकर पूरी तरह चुप्पी साध ली है। इसे एक सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है।
स्थानीय शरण: नरवाल छोड़ रहे सद्दाम नामक व्यक्ति के अनुसार, इनकी पहली कोशिश जम्मू के ही दूसरे हिस्सों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के पास शरण लेने की है।
अन्य राज्य: यदि जम्मू में बात नहीं बनी, तो ये परिवार पंजाब, हरियाणा के नूंह, हैदराबाद या बंगलूरू जैसे शहरों का रुख करेंगे।
पुराने संपर्क: सूत्रों के मुताबिक, इन महानगरों में रोहिंग्याओं के लिए पहले से ही पुराने संपर्क मौजूद हो सकते हैं।
साल 2008 से जम्मू में डेरा डाले इन रोहिंग्याओं ने पिछले 18 वर्षों में स्थानीय बोली, पहनावे और रहन-सहन को पूरी तरह अपना लिया है। एक ही स्थान यानी नरवाल में केंद्रित होने के कारण इनकी निगरानी करना आसान था।
अब इनके अलग-अलग राज्यों में बिखरने के कारण इनकी ट्रैवल हिस्ट्री और संभावित ठिकानों को ट्रैक करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है। पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए ये सहानुभूति का कार्ड खेलने और अपनी पहचान छिपाने का षड्यंत्र रच रहे हैं।
इस स्थिति को भांपते हुए जम्मू के आसपास के जिलों जैसे उधमपुर, कठुआ, रियासी, पुंछ और राजोरी को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियों को भी इनकी संभावित आवाजाही को लेकर अलर्ट पर रखा गया है।
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इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने इसे प्रशासन की एक अच्छी और पहले उठाई जानी चाहिए कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि जम्मू जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इन्हें शरण देना खतरनाक है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये लोग किस दिशा में जा रहे हैं। पूर्व डीजीपी ने सुझाव दिया कि इन्हें दूसरी जगहों पर बसने से रोकने के लिए कंटेनमेंट सेंटर बनाए जाने चाहिए और अंततः इन्हें म्यांमार वापस भेजा जाना चाहिए ताकि देश में नई अवैध बस्तियां न बस सकें।
Location : Jammu
Published : 18 September 2026, 10:11 AM IST